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उपासना बेहार की बाल कहानी - पंख अभी छोटे हैं

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एक शहर के बीचों बीच बड़ा सा पार्क था, पार्क में बहुत सारे बड़े बड़े पेड़ लगे हुए थे। उन्ही पेड़ों में से एक पेड़ में चिडि़या अपने परिवार के साथ रहती थी। उसके तीन छोटे बच्चे थे। चिडि़या रोज बच्चों को घोंसले में छोड़ कर सुबह से खाना लाने चली जाती और शाम को घोसले में वापस आती थी। तब चिड़िया के बच्चों में से एक बच्चा अपनी मां से हमेशा पूछता कि “मां पेड़ के बाहर की दुनिया कैसी होती है, आज आपने क्या क्या देखा” मां कहती “बेटा दुनिया बहुत ही खूबसूरत है” और वो बच्चों को बताती कि आज कहाँ कहाँ गई थी तो वह बड़े ध्यान से बातें सुनता और कहता “मां मैं कब इस खूबसूरत दुनिया को देख पाऊॅगा”. “बेटे तुम अभी छोटे हो, तुम्हारे पंख ठीक से बने नहीं हैं और तुमने अभी सही तरीके से उड़ना भी नहीं सीखा है, कुछ महिने ओर रुक जाओ फिर तो जिंदगी भर उड़ते रहना है। अगर अभी बाहर गये तो कोई भी जानवर तुम्हें मार देगा। बच्चा उस समय तो चुप हो जाता लेकिन उसके मन में उथल पुथल मची रहती।

एक दिन जब मां भोजन लेने के लिए गयी तब बच्चे ने सोचा “अभी मैं छोटा हूँ तो पूरी दुनिया नहीं घूम सकता पर कम से कम इस पार्क की दुनिया तो देख ही सकता हूँ और मां के आने से पहले मैं वापस आ जाऊॅगा। जिससे माँ को भी पता नहीं चलेगा, वह अपने अन्य भाई बहनों को बताये बिना ही धीरे से घोंसले के बाहर आ जाता है और पेड़ के तने से जमीन पर उतरता चला जाता है। जब वह पेड़ के नीचे पहुँचता है तो देखता है कि जमीन हरे भरे घास से ढंका हुआ है। आसपास तरह तरह के रंग बिरंगे फूल खिले हैं, यह सब देख कर वह आश्चर्यचकित हो जाता है। इससे पहले उसने इतने सुंदर फूल कभी नहीं देखे थे। वो खुशी के मारे जोर जोर से फुदकने लगता है। तभी फूल पर एक सतरंगी तितली आकर बैठती है। उसने आज तक ऐसी अनोखी तितली नहीं देखी थी, वह सोचता है कि क्यों ना इस अनोखी तितली से दोस्ती की जाये वह तितली के तरफ बढ़ता है तभी सतरंगी तितली उड़ जाती है, चिडि़या का बच्चा कुछ सोचे समझे बिना ही उसके पीछे भागने लगता है। तितली का पीछा करने के चक्कर में वह अपने पेड़ से दूर निकल आता है।

तभी सामने से एक बिल्ली आती दिखायी देती है। बिल्ली ने जैसे ही चिडि़या के बच्चे को देखा उसके मुंह में पानी आ गया। वह अपने शिकार को किसी भी कीमत पर अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। इसलिए बिल्ली झपटा मारने के लिए बच्चे की ओर तेजी से दौड़ा। बच्चे ने अपने जिंदगी में पहली बार इतना भयानक जानवर देखा था, वह घबरा गया, उसने उड़ने की बहुत कोशिश की पर उड़ नहीं पाया, उसने सोचा अब मेरी मौत निश्चित है, उसे मां की सीख बात याद आने लगी लेकिन अब कुछ नहीं किया जा सकता था। तभी उसने देखा कि उसकी मां तेजी से आसमान से नीचे की ओर आयी और उसे चोंच में उठा लिया और घोंसले की ओर चल पड़ी, बिल्ली हाथ मलता रह गया। घर पहुँच कर माँ ने बच्चे को चोंच से नीचे उतरा, लेकिन बच्चा बहुत डरा हुआ था वह बहुत देर तक अपनी मां से चिपका रहा। उसकी मां से कहा “आज मैं समय पर आ गयी इस कारण तुम बच गये नहीं तो वो बिल्ली तुम्हें खा जाता”. बच्चे ने कान पकड़ते हुए कहा “मां मुझे माफ कर दो, आपकी बात सुननी चाहिए थी। आज मुझे बहुत बड़ा सबक मिला है, अब मैं अच्छे से उड़ना सीख लूंगा उसके बाद ही दुनिया देखूंगा”. ये कह कर वह फिर से अपनी माँ के गले लग गया.

 

उपासना बेहार

ई मेल – upasana2006@gmail.com

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