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अखिलेश कुमार भारती की कविता - जीवन संघर्ष की जयगाथा

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जीवन में इस तरह उदास न होना,

मिली असफलता से निराश न होना,

जीवन सुख-दुःख का पहिया है,

कभी किसी वक्त हताश न होना |

 

जीवन में आए मुश्किलों से अपने को परेशान न करना,

जीवन उतार-चढ़ाव का पर्याय है,

कवि अपने आत्मबल को कमजोर न होने देना |

 

यही है जीवन आनंद का अंदाज़,

हर किसी के जीने का असल में,

हर कोई को इस अंदाज़ को न खोने देना |

 

पत्थरों को टूटते भी देखा,

आसमां को भी रोते देखा,

सूरज की पहली किरण से,

जीवन आनंद विभोर होते हुए भी देखा |

 

इंसानियत की भाषा लिए,

दुनिया में शांति का आनंद भी देखा |

 

इंसान के संघर्ष से,

उसके व्यक्त्तिव की चमक भी देखा,

जिससे उजाला हो,

उसे जलता भी देखा,

कामयाब हुए इंसान के संघर्षपथ को भी देखा,

जो निरंतर परिश्रम करते हैं,

उनकी कामयाबी भी देखा,

जीवन में इस तरह उदास न होना,

मिली असफलता से निराश न होना,

जीवनपथ में संघर्ष कर अपने को सफल बनाना |

--

AKHILESH KUMAR BHARTI

JUNIOR ENGINEER

MPPKVVCL, JABALPUR

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