मंगलवार, 13 अक्तूबर 2015

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की ग़ज़ल

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        तीर चढ़ा है,फिर कमान पर,
         बन आई है,किसी जान पर।

        अड़े रहेंगे,नहीं हटेंगे,
        मरे मिटे हैं स्वाभिमान पर।

        आशा कुछ कुछ अब जागी है,
        जूं रेंगी है,अभी कान पर।

        सौ की रेखा पार करेंगे  
        ध्यान रखा है,खान पान पर।

        कैसे अब भागोगे यारो,
        शेर चढ़ रहे हैं ,अब मचान पर।

 

12 शिवम् सुंदरम  नगर छिंदवाड़ा म प्र

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