रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की ग़ज़ल

image

        तीर चढ़ा है,फिर कमान पर,
         बन आई है,किसी जान पर।

        अड़े रहेंगे,नहीं हटेंगे,
        मरे मिटे हैं स्वाभिमान पर।

        आशा कुछ कुछ अब जागी है,
        जूं रेंगी है,अभी कान पर।

        सौ की रेखा पार करेंगे  
        ध्यान रखा है,खान पान पर।

        कैसे अब भागोगे यारो,
        शेर चढ़ रहे हैं ,अब मचान पर।

 

12 शिवम् सुंदरम  नगर छिंदवाड़ा म प्र

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget