रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

डॉ बच्चन पाठक 'सलिल' की ग़ज़ल

image

ग़ज़ल 

-------

डॉ बच्चन पाठक 'सलिल'

बीस सालों से नहीं हूँ मैं गया जिस गांव में 

फोन पर संक्षेप में भाई बताना तुम जरा। 

 

रब्बी फसल कैसी रही इस साल अपने गांव की 

जवार में सम्बन्ध कैसे हैं भाई बताना तुम जरा 

 

छोटे बाबू हैं बसे लन्दन में इसे हूँ जानता 

दुबई गए हैं कौन सब भाई बताना तुम जरा

 

आज कल किसके हैं कब्जे में पुराना खंडहर 

जिसके लिए गोली चली भाई बताना तुम जरा।

 

ब्रह्म बाबा रात में क्या है अभी भी घूमते 

ओझा थे जिनको देखते भाई बताना तुम जरा।

 

डिस्पेंसरी में सर्प डंसने की दवा क्या आ गयी ?

कितने मरे जिसके बिना भाई बताना तुम जरा।

 

चौपाल में होती गवनई आज भी क्या रात भर ?

शायद कभी आ कर सुनूं भाई बताना तुम जरा।

पता-सलिल निवास, बाबा आश्रम, पञ्च मुखी हनुमान मंदिर के पास, आदित्यपुर-२,

       जमशेदपुर -१३

फोन- ०६५७/२३७०८९२

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget