शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2015

सुरभि सक्सेना की ग़ज़ल - अपना कहो मुझे और खुशियां हज़ार दो

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अपना कहो मुझे और खुशियां हज़ार दो
यूँ ही किसी गरीब की किस्मत सँवार दो

दीवाना बन गया हूँ तेरी तिरछी नज़र का
पलकें झुका, झुका के, दिल को क़रार दो

जीता हूँ तेरे प्यार में, खामोश हूँ मगर
कभी तो मेरे प्यार का, सदका उतार दो

महका हुआ बदन तेरा, ऑंखें है मरमरी
छूकर मुझे ऐ गुलबदन, मुझको निखार दो 

#Surabhi Saxena
Geetkar , Actress, poetess, Radio jockey
surabhisaxena77@gmail.com

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