रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

विजय वर्मा की कविता - चाँद

  चाँद

चाँद बहुत चकित है -----

' इस धरा को क्या हुआ है ?'

धरा क्यों इतनी व्यथित है ?

पयोनिधि भी है मलिन सा

चमक खो चुके कालीन सा ।

पवन में है ज़हर भरा

है इसीलिए दुखी धरा।

द्रुमदल हुए निर्जीव-से

अब क्या पूछें? किस जीव से ?

तटिनी हुई बदरंग अब

प्रकृति के संग ही

छिड़ी  हुई है जंग अब।

इंसानों की करतूत से

प्रकृति भयभीत है।

यह तो इंसानों की हार है।

आपको लगता है यह जीत है ?

चाँद इसीलिए चकित है।

 

V.K.VERMA.D.V.C.,B.T.P.S.[ chem.lab]

vijayvermavijay560@gmail.com

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget