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बी. के. गुप्ता की कविताएँ

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''चाहत''

हम चाहते हैं जिसको दिल और जान की तरह,
वही दिल मेरा दुखाते हैं अन्जान की तरह।।

हम हंसाते हैं हमेशा जिनको नादान की तरह,
वही अक्सर हमें रूलाते हैं बेजान की तरह।।

उन्हें हमसे है मुहब्बत या किसी गैर से ,
क्यों दिल मेरा जलाते हैं शैतान की तरह।।

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''तेरा नाम लिख दिया''

मिली जो थोड़ी स्याही तेरा नाम लिख दिया।
दिल की धड़कनों में तेरा नाम लिख दिया।।

तन्हाईयाँ मिलती थी मुझे तेरी याद से ,
आया कोई आँसू तो तेरा नाम लिख दिया।

मिले जो गम मुझे कुछ तेरे प्यार में,
पीकर गमों का जाम तेरा नाम लिख दिया।

लिखा था एक नाम दिल की आवाज से,
पूछा किसी ने नाम तेरा नाम लिख दिया।

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''वक्त के साथ''

मिट जायेंगें गम वक्त के साथ में।
गर हम तुम चलें वक्त के साथ में।।

क्या हिन्दू ,क्या मुस्लिम ,क्या जाति-धर्म,
सब मिलकर लड़ें जुल्म के साथ में।

आज दिखती नहीं भारतीय संस्कृति,
तन दिखने लगा फैशन के साथ में।

प्यार मुहब्बत में जब मिलने धोखे लगे,
जिस्म बिकने लगा शराब के साथ में।

आज घात कर रहे बहन बेटियों के संग,
बच्चों को रखें आज किसके साथ में।

किसे अपना कहें किसे पराया कहें ,
बदल जाते है लोग वक्त के साथ में।

खुदा से भी कहाँ अब डरते है लोग,
गुनाह करने लगे भक्तों के साथ में।

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''तन्हाई का आलम''

मेरे तन्हाई के आलम में ,जब वो दिख जाती है।
दिल मेरा ठहर जाता है, धड़कन रूक जाती है।।

हर इल्जाम मुहब्बत का ,मेरे सर लिख देती है।
जब अपनी अदाओं का, वो जलवा दिखाती है।।

जब कभी रातों को ,सपनों मे वो आती है।
नींदें उड़ जाती हैं, बेचैनी छा जाती है।।

रब जाने कितनों की ,नजरें बहकाती हैं।
जब तिरछी निगाहों से, वो नजरें मिलाती है।।

अपने चाँद से मुखड़े को ,जब आईना दिखाती है।
आईना भी संवर जाता है,जब वो दिख जाती है।।


कलम हाथों में उठायें तो, तेरी याद आ जाती है।
गर गीत लिखूँ कोई ,गजल तेरी लिख जाती है।।

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''आज भी''

तेरी चाहत के हम आज भी दीवाने हैं।
मेरे दिल में जख्म आज भी पुराने हैं।।

गैरों से तुम्हें फुरसत कहाँ है मेरे लिए,
तुझसे मिलने के ख्वाब आज भी पुराने हैं।

आज गुम-सुम सी हो गई हैं रातें ,
मेरे सर पर इल्जाम आज भी पुराने हैं।

कभी तन्हाई में ही मुझको याद कर लेना,
मेरे मोबाइल में मैसेज आज भी पुराने हैं।


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नाम-बी.के.गुप्ता
पूरा नाम-बृज किशोर गुप्ता
पिता का नाम-श्री लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता
माता का नाम-ऊषा गुप्ता
जन्म तिथि-01-जुलाई सन्1982
जन्म स्थान-ग्राम-चन्दौरा तहसील-अजयगढ
़जिला-पन्ना(म.प्र.)
शिक्षा-बी.ए.(समाज शास्त्र) एवं कम्प्यूटर पी.जी.डी.सी.ए.
व्यवसाय-कम्प्यूटर शिक्षक
कैपीटल कम्प्यूटर आई.टी.एण्ड साइन्स बड़ामलहरा
जिला-छतरपुर म.प्र.
विधा-कविता ,गजल ,निबंध।
प्रकाशित कविता -नारी की व्यथा काव्यसागर.कॉम पर।
अन्य 10 कविताएँ रचनाकार पर।
संक्षिप्त परिचय-मेरी लेखनी सन् 2006 से कम्प्यूटर पर पहली हास्य कविता लिखने से शुरू हुई इसके बाद शेर और शायरी तथा निबंध  लिखता रहा और सन् 2014 में मैंने फेसबुक और यू-ट्यूब में कवि-सम्मेलनों का प्रसारण देखा और लिखने के लिए मेरे दिल में विचार आये और मैं गजल लिखना भी प्रारम्भ कर दिया जो फेसबुक  में डाला और मुझे कवियों के लाइक कमेंट मिलने लगे जब से मैं आज तक लिखता ही जा रहा हॅू। 11 सितम्बर2015  को बड़ामलहरा मे हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन मे काब्य पाठ का मौका मिला । सबसे से अधिक सहयोग यू-ट्यूब और फेसबुक से मुझे प्राप्त हुआ। आज भी लेखन जारी है।

स्थाई पता-बी.के.गुप्ता
ग्राम-चन्दौरा तहसील-अजयगढ
जिला-पन्ना(म.प्र.)
वर्तमान पता- बी.के.गुप्ता
कैपीटल कम्प्यूटर आई.टी.एण्ड साइन्स बड़ामलहरा
जिला-छतरपुर म.प्र.
मोब.-9755933943
ई-मेल- bkgupta193@gmail.com
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ऊपर का चित्र - रेखा श्रीवास्तव की कलाकृति.

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