शुक्रवार, 9 अक्तूबर 2015

मनोज 'आजिज़' की कविता - आओ ऐसा भारत गढ़ें

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बना मूरख लोगों को नेता
पका रहे अपनी बिरियानी
लोक-भावना को बिगाड़कर
करते अपनी मनमानी।

अजीब माहौल बना देश में
राम को आस न्याय की
रहीम हैं घोर संशय में कि
क्या हालत हो उनके अनुयायी की।

शताब्दियों से चलती आई
परंपरा एक ऐसी यहाँ
राग-द्वेष छोड़ रहते यहाँ
दुनिया में जगह ऐसी कहाँ ?

आओ सभी साथ मिलकर
एक ऐसा भारत को गढ़ें
हिंसा, आक्रोश की जड़ों को
प्यार से दल आगे बढ़ें।

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