गुरुवार, 22 अक्तूबर 2015

अखिलेश कुमार भारती की कविता - जीवन- दर्शन की अभिलाषा

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अँधियारा जाने को है,

नया सवेरा आने को है

जीवन के कठिन मोड़ पे,

नए चेतना उन्मुक्त होने को है |

जीवन को उत्कृष्ट करें,

तन-मन को निर्मल करें

ह्रदय को पवित्र करें

नया वातावरण बनने को है |

अपनी कुशल क्षमताएँ पहचानें,

सारी सुख-सुविधाएँ आने को है |

वो वक्त आज आने को है,

चेहरे पर मुस्कान लेकर

जीवन के कठिन मोड़ पे,

नए मुकाम हासिल होने को है |

सागर की लहरों जैसा,

जीवन में आनंद आने को है

सूरज की रौशनी सा,

दुनिया में नया सवेरा होने को है

नए मुकाम हासिल होने को है |

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AKHILESH KUMAR BHARTI

JUNIOR ENGINEER

MPPKVVCL

(Akhilesh.bharti59@gmail.com)

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