आलेख || कविता ||  कहानी ||  हास्य-व्यंग्य ||  लघुकथा || संस्मरण ||   बाल कथा || उपन्यास || 10,000+ उत्कृष्ट रचनाएँ. 1,000+ लेखक. प्रकाशनार्थ रचनाओं का  rachanakar@gmail.com पर स्वागत है

-------------------

कृष्ण कुमार चंचल का लघु-आलेख - बिदाई

image
बिदाई

अपनी कोमल ऊँगलियों से पापा के कठोर हाथों को छूती उसकी हथेली, छोटे-छोटे कदमों से चलके सुबह पापा के मोज़े तलाशती उसकी मासूम निगाहें, गाड़ी की चाभी कभी, कभी पेन या रूमाल छिपा के ऑफिस न जाने देने का बहाना बनाती उसकी शरारती व निःश्चल मुस्कान।
टिफ़िन में अपने हाथों की बनी टेढ़ी-सीधी, कच्ची-पक्की रोटी रख के मम्मी के आँचल से अपना पसीना पोंछते उसके वो फरिश्ते जैसे हाथ।
ऑफिस से लौटने पर दौड़कर गोद में चढ़कर ज़ेब में टाफियों को तलाश करती नन्हीं चिड़ीया, न मिलने पर शिकायत की अदा और मिलने पर घुँघरूओँ सी छनकती हँसी।
अपनी मम्मी से हमेशा होड़ कि पापा को पानी कौन पहले ला कर देता है। पापा का टावेल लाना या अपने हाथों से पापा का शू पॉलिश करना फिर चाहे वो ब्लेक शू पर रेड पॉलिश ही क्यों न हो।
स्कूल के पिकनिक की परमिशन या कॉलेज़ के टूर पर जाने के लिए पापा के पॉकेट से पैसे निकालने की हरकत साथ ही भाई का मोबाइल रिचार्ज कराने को उसमें से हिस्सा देने की अदा। रिज़्लट बिगड़ने पर पापा के क्रोध से भाई को बचाती उसकी ढाल बन के सामने आकर खड़े होने की स्टाइल।
खाँसने की आवाज़ सुनते ही अपने हाथों से ज़बरन कड़वी गोलियाँ खिलाना। अपनी स्कूटी पे बिठा के पापा को ऑफिस छोड़ने की ज़िद करना। नये-नये कपड़े पहनकर सबसे पहले पापा को दिखाने की ज़िद लिए इंतज़ार करती वो हिरनी जैसी चुलबुली आँखें।
अब कभी नज़र नहीं आयेंगी................................................

क्योंकि आज उस बिटिया की बिदाई है।

कृष्णा कुमार चंचल

M/9-D, Maroda Sector, Bhilai,

C.G. 490006

Mob. No.9630820666

टिप्पणियाँ

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.