कृष्ण कुमार चंचल का लघु-आलेख - बिदाई

image
बिदाई

अपनी कोमल ऊँगलियों से पापा के कठोर हाथों को छूती उसकी हथेली, छोटे-छोटे कदमों से चलके सुबह पापा के मोज़े तलाशती उसकी मासूम निगाहें, गाड़ी की चाभी कभी, कभी पेन या रूमाल छिपा के ऑफिस न जाने देने का बहाना बनाती उसकी शरारती व निःश्चल मुस्कान।
टिफ़िन में अपने हाथों की बनी टेढ़ी-सीधी, कच्ची-पक्की रोटी रख के मम्मी के आँचल से अपना पसीना पोंछते उसके वो फरिश्ते जैसे हाथ।
ऑफिस से लौटने पर दौड़कर गोद में चढ़कर ज़ेब में टाफियों को तलाश करती नन्हीं चिड़ीया, न मिलने पर शिकायत की अदा और मिलने पर घुँघरूओँ सी छनकती हँसी।
अपनी मम्मी से हमेशा होड़ कि पापा को पानी कौन पहले ला कर देता है। पापा का टावेल लाना या अपने हाथों से पापा का शू पॉलिश करना फिर चाहे वो ब्लेक शू पर रेड पॉलिश ही क्यों न हो।
स्कूल के पिकनिक की परमिशन या कॉलेज़ के टूर पर जाने के लिए पापा के पॉकेट से पैसे निकालने की हरकत साथ ही भाई का मोबाइल रिचार्ज कराने को उसमें से हिस्सा देने की अदा। रिज़्लट बिगड़ने पर पापा के क्रोध से भाई को बचाती उसकी ढाल बन के सामने आकर खड़े होने की स्टाइल।
खाँसने की आवाज़ सुनते ही अपने हाथों से ज़बरन कड़वी गोलियाँ खिलाना। अपनी स्कूटी पे बिठा के पापा को ऑफिस छोड़ने की ज़िद करना। नये-नये कपड़े पहनकर सबसे पहले पापा को दिखाने की ज़िद लिए इंतज़ार करती वो हिरनी जैसी चुलबुली आँखें।
अब कभी नज़र नहीं आयेंगी................................................

क्योंकि आज उस बिटिया की बिदाई है।

कृष्णा कुमार चंचल

M/9-D, Maroda Sector, Bhilai,

C.G. 490006

Mob. No.9630820666

-----------

-----------

0 टिप्पणी "कृष्ण कुमार चंचल का लघु-आलेख - बिदाई"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.