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गोवर्धन यादव का आलेख - अंक और उनका मनुष्य जीवन से सम्बन्ध

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 अंक सामान्यतया गणित सम्बन्धी कार्यो में प्रयुक्त होते हैं. उनका प्रयोजन उतने ही क्षेत्र में सीमित पाया जाता है, किन्तु कभी-कभी ऎसे विलक्षण संयोग सामने आते हैं, जिनसे प्रतीत होता है कि उनका क्रम मनुष्य जीवन को प्रभावित करता है. कोई अंक किसी के लिए शुभ और किसी के लिए अशुभ साबित होता है यद्यपि उसका कारण समझ में नहीं आता. इसी प्रकार घटनाक्रमों की एक जैसी पुनरावृत्ति में कई बार अंकों की अद्भुत पुनरावृत्ति पायी जाती है. पंचांगकर्त्ता बताते हैं कि अमुक क्रम में ग्रह, नक्षत्र अपने चक्र में घूमकर यथा स्थान आते रहते हैं और जो पंचाग एक वर्ष का था वह इतने समय में ज्यों का त्यों आ उपस्थित होता है.

फ़िर भी यह तो एक आश्चर्यजनक बात है कि कई अंक किसी व्यक्ति विशेष को अच्छे या बुरे आधार लेकर सामने आयें. अंकों के हिसाब से घटनाक्रमों की पुनरावृत्ति भी कई बार ऎसी ही विलक्षण होती है जिन्हें संयोग न कहकर कुछ रहस्यमय कारण होने की बात सोचनी पड़ती है.

कुछ विशेष तिथियाँ न जाने कैसा अज्ञात प्रभाव लेकर आती है, जिनका व्यक्ति विशेष पर कुछ विलक्षण प्रभाव पडता है. वे तिथियाँ जब भी आती हैं तब कुछ विचित्र संयोग बिठा देती हैं. नेपोलियन और ड्युक आफ़ विलिंगडन के जीवन क्रम में तारीखों की दृष्टि से अद्भुत समता है. दोनों १५ अगस्त १७६० को जन्में. दोनों के पिताओं की मृत्यु उनके सोलहवें वर्ष में हुई. ड्युक को जिस दिन जनरल का पद मिला उसी दिन नेपोलियन की नियुक्ति लेफ़्टिनेन्ट पद पर हुई. आश्चर्य है कि वे दोनों मरे भी एक ही दिन.

हिटलर और नेपोलियन के जीवन में भी तिथियों सम्बन्धि ऎसी ही समता है. वर्षों के दृष्टि से १२९ वर्ष का अन्तर जरुर है, पर उनके क्रिया-कलापों में कितनी ही घटनाएँ पुनरावृत्ति जैसी हैं. नेपोलियन २० अप्रैल १७६० में जन्मा और हिटलर २९ अप्रैल १८७९ को. फ़्रांस में राज्य-क्रान्ति १७८९ में हुई और जर्मनी में १९१८ को, नेपोलियन ने १८०४ में सत्ता हथियायी और हिटलर ने १९३३ में. नेपोलियन ने रूस पर हमला १८१२ में किया था और हिटलर ने १९४१ में. वियना सन्धि १८१५ में हुई और जर्मन सन्धि १९४४ मे,. यह ऎसे संयोग हैं जिनके आधार पर हिटलर को नेपोलियन को दूसरा संस्करण कहा जा सकता है.

अमेरिका के दो राष्ट्रपतियों में भी ऎसी ही विलक्षण समता है. अब्राहम लिंकन १८६० में राष्ट्रपति चुने गए और कैनेडी १९६० में. दोनों की हत्याएँ शुक्रवार के दिन हुई और उन दुर्घटनाऒ के समय दोनों की पत्नियाँ साथ थीं. लिंकन का हत्यारा जान विल्किस बूथ १८३९ में जन्मा था और कैनेडी का हत्यारा हार्थे आस्वाल्ड १९३९ में पैदा हुआ था. इन दोनों हत्यारों की अदालत द्वारा कोई सजा सुनने से पूर्व ही हत्या हो गई. ये दोनों दक्षिण अमेरिका में जन्में थे. लिंकन के निजी सचिव ने उन्हें उस दिन नाट्य गृह न जाने की सलाह दी थी, जिसे उन्होंने नहीं माना. ठीक ऎसा ही कैनेडी के साथ हुआ, उनके निजी सचिव उलास ने उन्हें उस यात्रा पर न जाने के लिए कहा था. जिन्हें उन्होंने नहीं माना और उसी तरह गोली के शिकार हुए जिस तरह से लिंकन मरे थे.

तिथियों का कुछ विचित्र संयोग देखिये- चन्द्रवरदाई और पृथ्वीराज चौहान घनिष्ठ मित्र थे वे दोनों एक ही दिन जन्में और एक ही दिन मरे भी.

महाकवि शेक्सपियर के लिए २३ अप्रैल जन्म देने भी आयी और वही २३ अप्रैल उन्हें उठा भी ले गई.

विवेकानद की शिष्या भगिनी निवेदिता के जीवन में अक्टूबर मास महत्त्वपूर्ण घटनाएँ प्रस्तुत करता रहा. वे २४ अक्टूबर १८६७ में जन्मी, २२ अक्टूबर १८९५ को उन्होंने विवेकानन्द को अपना समर्पण दिया. २० अक्टूबर को उन्होंने महर्षि अरविंद से महत्त्वपूर्ण भेंट की और १३ अक्टूबर १९११ में वह संसार छॊडकर चली गईं.

वीर सावरकर के जीवन में फ़रवरी माह अशुभ रहा. हेग के अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय ने उन्हें २५ फ़रवरी १९११ को सजा दी और ठीक ५५ वर्ष बाद २६ फ़रवरी १९६६ को उनकी मृत्यु हो गई.

लोकमान्य तिलक के जीवन की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ मंगलवार को घटित होती रही है. उनका केशरी पत्र मंगलवार को प्रकाशित हुआ. स्वतन्त्रता संग्राम में वे मंगल को पकडॆ गए और जमानत पर भी मंगल के दिन ही छूटॆ. मंगलवार से मुकदमा चला और जेल से छूटने का दिन भी वार था.

शुक्रवार को लोग शोक दिवस मनाते हैं, ईसा, सुकरात, गाँधी, लिंकन, कैनेडी आदि कितने ही महापुरुषॊं को शुक्रवार ने उदरस्थ किया है.

किन्हीं के जीवन में कुछ अंकों की विशेष महत्ता रही है. प्रिंस विस्मार्क को ३ का अंक कुछ विलक्षण संयोग लाता रहा. उन्होंने अपने तीन नाम रखे लाएन वर्ग-शोवासेनी और विस्मार्क. उन्हें तीन उपाधियाँ मिलीं--प्रिंस, ड्यूक तथा काउण्ट. वे तीन कालेजों में पढे. उनके तीन बेटॆ हुए. वे तीन देशों में राजदूत रहे. वे तीन युद्धों में लड़ने गए. उन्होंने तीन घोडॆ गँवाए. तीन बार इन पर घातक आक्रमण हुए. तीन बार उन्होंने त्याग पत्र दिए.

लालबहादुर शास्त्री जी के लिए १० के अंक से कुछ अनोखे सम्बन्ध थे. वे अंग्रेजी वर्ष के दशवें महीने अक्टूबर में जन्मे. उन्होंने मन्त्रित्व आदि १० महत्त्वपूर्ण पद सँभाले. उनके दिल्ली निवास स्थान का नम्बर १० था. उनकी मृत्यु १० तारीख को हुई. रोमन लिपि में लालबहादुर शब्द लिखने में १० अक्षर ही प्रयुक्त होते हैं.

साइप्रस के शासनाध्यक्ष मकरिआस के लिए १३ का अंक कुछ ऎसे ही संयोग लाता रहा. वे १३ अगस्त १९१३ को जन्मे. १३ वर्ष की आयु में चर्च में भर्ती हुए. १३ नवम्बर १९४६ में उन्होंने प्रोस्ट दीक्षा ली. १३ जून १९४८ में वे विशप बने तथा राजगद्दी पर बैठे. १३ मार्च १९५१ में यूनान के राजा ने उनका अभिनन्दन किया. १३ दिसम्बर १९५९ को वे राष्ट्रपति चुने गए.

प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी के लिए १३ का अंक महत्त्वपूर्ण रहा है. उन्हें १३ महीने की जेल भुगतनी पडी. उनका असली नाम प्रियदर्शिनी है जिसे रोमन लिपि में लिखने पर १३ अक्षर प्रयुक्त होते हैं. उन्हें ४९ वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री पद मिला. इन ४ और ९ का जोड १३ होता है. उनके चुनाव में कुल संसदीय मतदान ५२६ का था. जिसमें से उन्हें ३५५ मत मिले. जो ६७ प्रतिशत हुआ इन दोनों संख्याओं के प्रयुक्त होने वाले अंकों का जोड १३ - १३ ही होता है.

संसार कितना विचित्र और विलक्षण है इसके रहस्यमय परत क्रमशः ही खुले और खुलते जा रहे हैं. मानवी बुद्धि प्रकृति के रहस्यों को धीरे-धीरे ही जानने समझने लायक बनी है और बनती चली जा रही है. अंकों का क्या कुछ सम्बन्ध मनुष्य जीवन के साथ जुडॆ हुए घटनाक्रमों से भी है यह तथ्य की यथार्थता कभी न कभी स्पष्ट होकर रहेगी.

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१०३, कावेरी नगर, छिन्दवाडा(म.प्र.) ४८०-००१ गोवर्धन यादव संपर्क- ०९४२४३-५६४००

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