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दिनेश कुमार जांगड़ा की कविता - भाई का बहन को पत्र

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प्रिय बहन,
 
1    मैं यहाँ अपने कार्यस्थल पर बिल्कुल ठीक हूँ। कल मुझे सूचना मिली कि आपने  कल ही तीसरी बेटी को जन्म दिया । सबसे पहले तो आपको घर में एक नया सदस्य आने की बधाई और शुभकामना। मैं समझ सकता हूँ कि आप जिस समाज में रह रहे हो वहाँ बेटे को बेटी से अधिक प्राथमिकता दी जाती है। आप पढ़े-लिखे समझदार हो और समझते हो कि बेटियां किसी भी तरीके से बेटों से कम नहीं होती। मेरे विचार से ये समाज के कुछ लोगों की संकीर्ण सोच ही है जो बेटी से अधिक बेटों को प्राथमिकता देते हैं। बेटी का होना मैं एक सौभाग्य का क्षण मानता हूँ। प्राचीन इतिहास से लेकर अब तक जब-जब बेटियों की कुशल परवरिश और शिक्षा हुई है बेटियों ने बेटों से भी अधिक सफलता पाई है। बेटी की संवेदनशीलता न केवल हर किरदार को बखूबी निभाती है, बल्कि बेटियां बुढ़ापे में माँ-बाप का सहारा भी बनती है। मुझे इसमें कोई संशय नहीं है कि पहली दो बेटियों  की तरह इस नए फ़रिश्ते का पालन-पोषण और शिक्षा पर भी आप पूरा ध्यान देंगे और मेरी राय है कि अब आपको ऑपरेशन करवाकर इन्हीं तीन बच्चों की परवरिश पर पूरा ध्यान देना चाहिए। मेरे ऊपर लिखे शब्दों और नीचे लिखी कविता में शायद आपके लिए कुछ भी नया ज्ञान नहीं है। परन्तु मैं अपने मन की बात आपसे कहना चाहता था इसलिए ये पत्र लिख रहा हूँ।

प्रभु के वरदान को दिल से गले लगाओ,
बेटी जन्मी है तो बेटी की ख़ुशी मनाओ।

बेटी उम्मीदों की नई परिभाषा होती है,
बेटी घर के आँगन की आशा होती है।
बेटी ही तो माँ दुर्गा बन पूजी जाती है,
बेटी ही सरस्वती बन हमें पढ़ाती है।
त्रिदेवों की माँ अनसूया भी एक बेटी थी,
यीशू की जननी मरियम भी बेटी थी।
लक्ष्मीबाई ने शत्रुसेना को पस्त किया,
बेटी ‘घोषा‘ ने वेदों को कंठस्थ किया।
बेटी के स्वर्णिम काल को और बढ़ाओ,
बेटी जन्मी है तो बेटी की ख़ुशी मनाओ।

वीर ‘न्यानिका‘ राजसिंहासन पर सजती थी,
विदुषी बेटियाँ वेदों की ऋचाएँ रचती थी।
देवी-देवताओं ने भी बेटी का सम्मान किया,
बेटी ने संकल्प से हर युग का निर्माण किया।
बेटी ही इल्तुतमिश की सबसे लायक संतान बनी,
रजिया निज शौर्य से दिल्ली की सुल्तान बनी।
बेटी ने सभ्यताओं पर अगणित उपकार किए,
बेटी ने वैज्ञानिक बन नूतन आविष्कार किए।
समता संस्कृति को नतमस्तक शीश झुकाओ,
बेटी जन्मी है तो बेटी की ख़ुशी मनाओ।

किरण बेदी की तीन बहने भी उतनी ही महान बनी,
चार बहने बिना भाई के भारत की पहचान बनी।
मेरीकॉम ने बाहुबल का विश्व में लोहा मनवाया,
बेटी ने ओलिंपिक में भारत को पदक दिलाया।
सानिया-सायना भी राष्ट्र का गौरवगान बनी,
खेलों में विजेता बन भारत की पहचान बनी।
बेटी के साहस ने बहानों को दरकिनार किया,
‘अरुणिमा‘ ने बिना पैर के एवरेस्ट को पार किया।
बेटी की महिमा औरों को भी बताओ,
बेटी जन्मी है तो बेटी की ख़ुशी मनाओ।

‘कल्पना‘ जैसी बेटियां अंतरिक्ष में कक्षा करती हैं,
बेटी सेना में जाकर देश की रक्षा करती है।
देश-घर के विकास में बेटी भी प्रतिभागी है,
बेटी जिस घर आए वो घर तो सौभागी है।
बेटी कर्मों की पावन सौगात भी लेकर आती है,
बेटी पेट के साथ हाथ भी लेकर आती है।
बेटी ने निज कौशल का बार-बार प्रमाण दिया,
बेटी ने सबसे ज्यादा बुजुर्गों का सम्मान किया।
बुढ़ापे की लकड़ी को पढ़ाकर मज़बूत बनाओ,
बेटी जन्मी है तो बेटी की ख़ुशी मनाओ।

2. आप अभी बेटी के जन्म की ख़ुशी मनाओ जब मैं छुट्टी लेकर घर लौटूंगा तो मिलकर ख़ुशी मनाएंगे। घर के सब बड़ों को मेरी ओर से प्रणाम एवं बच्चों को बहुत-बहुत प्यार और आशीर्वाद।

 


दिनांक-     28   सितम्बर 2015                                             आपका भाई
                                       

                                        (दिनेश कुमार जांगड़ा)


लेखक  परिचय
नाम-दिनेश कुमार जांगड़ा  (डी जे)
सम्प्रति- भारतीय वायु सेना में वायु योद्धा के रूप में कार्यरत
तिथि -    10.07.1987
शिक्षा-     १. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा कनिष्ठ शोध छात्रवृत्ति एवं राष्ट्रीय     पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण      २. समाज कार्य में स्नातकोत्तर उपाधि
            ३. योग में स्नातकोत्तर उपाधिपत्र
लिखित पुस्तकें -         दास्तान ए ताऊ, कवि की कीर्ति एवं प्रेम की पोथी
पता-             मकान नंबर 1,बाडों पट्टी, हिसार (हरियाणा)- 125001
फेसबुक . www.facebook.com/kaviyogidj

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