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अभिव्यक्ति पर खतरे के खिलाफ मजबूती से खड़ा है मीडिया ः केदारनाथ सिंह

उदयपुर के प्रो. माधव हाड़ा को दिया गया डॉ घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार, प्रो. गोबिंद प्रसाद व डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में साहित्यकारों ने की शिरकत

चूरू, 11 अक्टूबर। प्रयास संस्थान चूरू की ओर से दिया जाने वाला प्रतिष्ठित डॉ घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार-2015 रविवार को शहर के सूचना केंद्र में आयोजित समारोह में उदयपुर के प्रो. माधव हाड़ा को उनकी पुस्तक ‘सीढ़ियां चढता मीडिया’ के लिए प्रदान किया गया। प्रख्यात गणितज्ञ डॉ घासीराम वर्मा की अध्यक्षता में हुए समारोह में मुख्य अतिथि हिंदी के नामचीन कवि केदारनाथ सिंह, विशिष्ट अतिथि प्रो. गोबिंद प्रसाद, लेखक-आलोचक डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने प्रो. हाड़ा को पुरस्कार स्वरूप इक्यावन सौ रुपए का चैक, साफा, शॉल व सम्मान पत्र भेंट किया।

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इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए ज्ञानपीठ व साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित केदारनाथ सिंह ने कहा कि माधव हाड़ा उभरते हुए चिंतनशील साहित्यकार हैं। उन्होंने कहा कि विश्व के सांस्कृतिक मानचित्र पर राजस्थान की महत्वपूर्ण उपस्थिति है तथा विजयदान देथा एशियाई साहित्य क्षेत्र की विलक्षण प्रतिभा थे। उन्होंने कहा कि आज जब अभिव्यक्ति पर खतरे मंडरा रहे है और बाेंलने की आजादी पर पाबंदियों के प्रयास हो रहे हैं, मीडिया ने इस खतरे को कम करने का प्रयास किया है। मीडिया ने अभिव्यक्ति की ताकत को बढाया है। अभिव्यक्ति पर मंडरा रहे खतरे पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि यदि आज के समय में दयानंद सरस्वती और गौतम बुद्ध जैसे क्रांतिधर्मी होते तो उनके साथ क्या व्यवहार किया जाता, यह कल्पना की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हम सब अपनी टूटन की आवाज हैं। यह समय टूटन का समय है। भाषा की रचना प्रक्रिया पर अपने विचार जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि भाषा को मिलावट से परहेज नहीं होना चाहिए। संस्कृत की शुद्धता ही उसके लिए नुकसानदायक रही। मीडिया की भाषा पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया की भाषा मिश्रित है और इससे एक नई भाषा का निर्माण हो रहा है। डॉ घासीराम वर्मा के व्यक्तित्व व कृतित्व तथा प्रयास संस्थान की गतिविधियों की सराहना करते हुए उन्होंने इस पर सुखद आश्चर्य और स्वस्थ गर्व व्यक्त किया और कहा कि छोटे से शहर से दिया जा रहा यह पुरस्कार अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विशिष्ट अतिथि नई दिल्ली के जवाहर लाल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर गोबिंद प्रसाद ने हाड़ा के लेखन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आलोचना व कविता के क्षेत्र में उन्होंने महत्वपूर्ण काम किया है। उन्होंने कहा कि समाज, साहित्य व भाषा पर बाजार का प्रभाव शुरू से ही रहा है। आज विज्ञापन की भाषा भी कविता की भाषा हो गई है।

मुख्य वक्ता हिंदी के ख्यातनाम लेखक-आलोचक डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने कहा कि मीडिया का हमारे जीवन में प्रभावी दखल है लेकिन मीडिया ने आदर्शों को बदला है और नई छवियां गढी हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम है और उसने इस भूमिका को बखूबी निभाते हुए दृष्टिकोण को बदलने का भी काम किया है। मीडिया का तीव्र दृश्य परिवर्तन पाठक व लेखक दोनों को प्रभावित कर रहा है। प्रो. हाड़ा के रचना-संसार पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वसनीय पाठक की उपस्थिति लेखक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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पुरस्कृत साहित्यकार प्रो. माधव हाड़ा ने अपने प्रत्युत्तर में केदारनाथ सिंह के हाथों सम्मानित होने को अपने जीवन का दुर्लभ व अविस्मरणीय क्षण बताया और कहा कि हिंदी में मीडिया से परहेज का रिवाज है। उन्होंने मीडिया की भाषा और मुहावरे तथा इसके साहित्य पर प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि मीडिया का शास्त्र नहीं बन सकता है और इसमें तात्कालिक धारणाएं अधिक प्रभावी होती हैं।

अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात गणितज्ञ डॉ घासीराम वर्मा ने बताया कि जब वे अंग्रेजी पढ़ते-पढ़ते ऊब जाते हैं तब हिंदी की पत्रिकाएं पढ़ते हैं। उन्होंने स्त्री शिक्षा को समाज के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी समय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने प्रख्यात कवयित्री महादेवी वर्मा को केवल स्त्री होने के कारण प्रवेश से इनकार कर दिया था, आज यह स्थिति बदल रही है और बदलनी चाहिए भी। उन्होंने संस्थान की ओर से दिए जा रहे इक्यावन सौ रुपए की राशि को भविष्य में अपनी ओर से बढाकर इक्यावन हजार रुपए किए जाने की भी घोषणा की।

इससे पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। भंवर सिंह सामौर ने स्वागत भाषण में अतिथियों का परिचय दिया। प्रयास के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने आभार व्यक्त करते हुए आयोजकीय जानकारी दी। संचालन कमल शर्मा ने किया। कुमार अजय, रामेश्वर प्रजापति रामसरा, देवीलाल गोदारा, डॉ रामकुमार घोटड़, सोहनसिंह दुलार, अभिषेक चोटिया, शिवकुमार मधुप, शैलेंद्र शर्मा, लखेंद्र सिंह दांदू, विकास मील, विकास बुडानिया, हेमंत सिहाग, राजीव स्वामी, मोहन सोनी चक्र, राजेंद्र मुसाफिर, सुधींद्र शर्मा सुधी, जसवंत सिंह मेड़तिया, श्यामसुंदर शर्मा, बाबूलाल शर्मा, मोहन लाल अर्जुन, बजरंग लाल पारीक, संजय गोयल, सत्यनारायण शांडिल्य, अनिल शास्त्री आदि ने अतिथियों का मालार्पण कर स्वागत किया।

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