मंगलवार, 13 अक्तूबर 2015

सी.बी. श्रीवास्तव की कविता - पर्यटन

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बंधी नियमित जिदंगी से होती है सबको घुटन
इससे मन बहलाव के हित जरूरी है पर्यटन

तेज गति के वाहनों से सुलभ अब आवागमन
घूमने जाने का इससे बढा दिखता है चलन

शिक्षा ने भी बढाया है परिभ्रमण का हौसला
इससे बढता जा रहा है टूरिज्म का सिलसिला

देश और विदेश में कई अनोखे स्थान हैं
जहां जाने देखने का मन में आता ध्यान है

ऐसे स्थल धार्मिक है प्राकृतिक या कलात्मक
और कई है ऐतिहासिक औद्योगिक या सृजनात्मक

पर्यटन सुविधाओं के भी है वहां साधन कई
और होती जा रही हैं आये दिन सुविधायें नई

स्थानीय लोागों को मिल जाते सहज रोजगार भी
इससे नये नये केन्द्रों को है रच रही सरकार भी

अलौकिक सुख शांति भी बिखरी वहां परिवेष में
खोजे गये है स्थल ऐसे देश और विदेश में

नदी निर्झर झील वन मोहक प्रकृति शोभा सुखद
अलौकिक सुख शांति है बिखरी जहां आनन्दप्रद

घोलती मधुरस जहां पर मन में नित प्राकृत छटा
बातें करती मौन सबसे प्रकृति हिलमिल सर्वदा

कान्हा रणथम्भौर कार्बेट इलोरा औ अजंता
बुलाते है मौन सबको मिलने नालन्दा गया

अभय वन में शेर चीता बायसन गेंडे सुअर
सहज दिखते घूमते फिरते निडर से बेफिकर

पर्वतों में हिमालय सतपुडा विन्ध्य अरावली
शत्रुओं के मन में जिनको देख मचती खलबली

नदिया अगणित पतित पावन गंगा यमुना नर्मदा
समुद्री तट झील डल जिनसे न मन होता विदा

किले जैसे ग्वालियर झांसी तथा चितौडगढ
है जहां इतिहास जीवित और जो अब भी सुदृढ

मूर्तियां खजुराहो की अब भी है सुंदर प्राणवान
जो धरोहर विश्व के इतिहास की सबसे महान

शहरों में दिल्ली अयोध्या काशी मुम्बई आगरा
जोधपुर जयपुर उदयपुर पटना चेन्नई द्वारका

देश और विदेश में लाखों सुघर स्थान हैं
जिनकी इस संसार में है प्रसिद्धि औ सम्मान है

दर्शनीय स्थलों से मिलता ज्ञान अनुभव जागरण
बहुत सी नई जानकारी और खुश होता है मन

बन गया है पर्यटन एक लाभप्रद उद्योग अब
कर रहे विस्तार इसका इसी से है देश सब

आइये इसका यथोचित हम भी तो शुभ लाभ लें
इस नवल उद्योग को बढने में समुचित साथ दें।

--

प्रो. सी.बी. श्रीवास्तव
ओ.बी. 11, एमपीईबी कालोनी
रामपुर, जबलपुर
मो. 9425806252

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