विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

सुरेन्द्र बोथरा ’मनु’ की कविता - तनहाई

image

 

विश्व वृद्ध-जन दिवस के अवसर पर विशेष

--

 

तनहाई

 

आज मेरी तनहाई

मुझसे पूछे है वो कहाँ गये,

अपनेपन का दावा करते

वो बेगाने कहाँ गये ?


आये तब मेले लाये थे

पर जाना है मेरे साथ,

जनम-जनम का साथ

निभाने वाले बोलो कहाँ गये ?


एक समय आनन्द बहुत था

सपने सब सच होते थे,

उलझी ज़ुल्फें, मादक नयना,

बाँके चितवन कहाँ गये ?


बहुत दिनों की बात है

झोली भर कर सपने लाया था,

अब बैठा सोचा करता हूँ

सब के सब वो कहाँ गये ?


तब ललाट की सलवट से

तनहाई मेरी बोल उठी,

नश्वर में अक्षर बैठा है

दोनों ही कब कहाँ गये ?


पुष्ट करो तुम उस अंकुर को

जो धरती से फूट रहा,

काल-अकाल निगल ले जिनको,

क्यों सोचो कब कहाँ गये ?


अनुभव के पल-पल को चुन-चुन

संचित कर लो मेरे पास,

रीत-रीत कर बीत गये जो

उनका क्या, कब कहाँ गये ?

 

सुरेन्द्र बोथरा,  email— surendrabothra@gmail.com

-- 
Surendra Bothra
Pl. visit my blog — http://honest-questions.blogspot.in/
Pl. follow my twitter — https://twitter.com/Surendrakbothra

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget