गुरुवार, 1 अक्तूबर 2015

नन्दलाल भारती की कविता - दर्द आदमी का नहीं , उसकी कायनात का होता है

image

दर्द आदमी का नहीं ,

उसकी कायनात का होता है

 

दर्द कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं 

और नहीं 

हमदर्दी बटोरने का कोई जरिया 

दर्द तो मन की तड़पन ,बदन के मर्दन की 

हृदय की कराह से उपज ,दंश होता है दर्द ............

 

दर्द दैहिक हो,दैविक हो ,या भौतिक हो 

दर्द अचानक मिला  हो 

लापरवाही या  खुद की गलती 

अथवा किसी कि  बेवकूफियों से 

मिले जख्म से उपजा हो दर्द 

परन्तु  दर्द  दर्दनाक होता  है ............

छाती या तन के किसी हिस्से का हो

दर्द शरीर के इतिहास भूगोल को 

बिगाड़ देता है 

मन को आतंकित कर 

नयनों को निचोड़ देता है 

हर जख्म से उपजा दर्द ...........

 

सच दर्द एक तन एक मन 

अथवा  एक व्यक्ति का नहीं रह जाता 

परिवार मित्र समूह

सगे  सम्बन्धियों  

का हो जाता है दर्द...........

 

दर्द की कई वजहें हो सकती है 

आकस्मिक दुर्घटना ,आतंकवाद, जातिवाद 

नारी उत्पीड़न शोषण अत्याचार 

और भी कई वजहें 

दर्द का असली एहसास तो 

उसी को होता है सख्स जो

मौत को छाती से गुजरते देखा होता है   ..........

 

जख्म चाहे जैसी हो 

हर जख्म  दर्द लिए होती है 

दर्द में दहन होता है 

दर्द का बोझ ढोने वाले शख्स के 

जीवन के पल,टूटते है उम्मीदों के बांध ..........

बहती है गाढ़ी कमाई बाढ़ के पानी की तरह 

थकता है हारता है मन 

टूटता है बदन कराह के साथ 

निचुड़ते हैं  कायनात के नयन 

आखिर में जीतती है हौसले की उड़ान 

सच सुकरात हो गए महान ..........

 

दर्द के उमड़ते सैलाब के  दौर में 

ना पीये कोई जहर का घूँट 

ले ले संकल्प, 

ना बने हम  किसी के दर्द का कारण 

इंसान है इंसानियत खातिर 

हो सके  तो करें निवारण 

क्योंकि दर्द बहुत दर्द देता है 

दर्द एक आदमी का नहीं ,

उसकी कायनात का होता है .........

 

डॉ नन्दलाल भारती  30 09 .2015   

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------