गुरुवार, 1 अक्तूबर 2015

जय प्रकाश भाटिया की कविता - बेटी : माँ रूप सृष्टि संचालक


image

लड़की जीवन का बोझ नहीं, लड़की जीवन  की जननी है,

माँ रूप सृष्टि संचालक है, और जग सरंचना करती है,

ममता की बन कर यह देवी,, नव जीव की पालन धरती है,

खुद सह कर भी असहनीय पीड़ा , हर जन्म सार्थक करती है,

 

यह बेटी है, बहन है, पत्नी है, और ममता की मूरत ‘माता’ है,

हर रूप में अपने सबके लिए, हर जीवन सुख की  दाता है,

कंजक रूप में ‘देवी माता’  है, घर घर में पूजी जाती है,

इसकी पूजा सुखदायी है, वर जो भी मांगों दे जाती है,

 

जब कली से नाज़ुक पुष्प है, यह--

क्यों फिर खिलने से पहले ही, यह डाल से तोड़ी जाती है, ???

धिक्कार है उन ‘वहशियों’ पर , कुकर्म जो ऐसा करते हैं,

अपने स्वार्थ और लालच में, इस पाप के भागी बनते हैं,

जिस माँ ने उनको जन्म दिया , जिस बहन ने अपना दुलार दिया ,

बेटी बन पिता को प्यार दिया, पत्नी बन सुख का संसार  दिया,

क्यों सब कुर्बानी भूल गए ---जो सबको कन्या जन्म से मिलती हैं ,

कन्या के जन्म से ही घर घर,  खुशियों की बगिया खिलती है,

 

आओ इस पावन नवरात्रे पर , मिल माता का गुणगान करें ,

कन्या को देवी स्वरुप समझ, हर पल उसका सम्मान करें,

--

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------