गुरुवार, 12 नवंबर 2015

प्रदीप गुप्ता की कविता–शुभ दीपावली 2015

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शुभ दीपावली - 2015

प्रभु राम !! तुम्‍हारे देश में, ये कैसा गड़बड़ झाला है

सिर के बाल सफेद हुए,  पर दिल अब भी काला है

 

दिल का अंधेरा मिटाने को,  दीप जलाओ ज्ञान का

सौहार्द्र का,  सद्भाव का,  मान का ओ सम्‍मान का

 

जहरीला धुआं  छाया चहूं ओर, संकट में  आई धरा

सब करतूत  हमारी है,  इससे मुक्ति की सोच जरा

 

किया था खात्‍मा राम ने,  अत्‍याचारी खर दूषण का

इस दीवाली हम सब मिलकर, संहार करें प्रदूषण का

 

प्रदीप गुप्‍ता

                                                                 11.11.2015

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