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सागर यादव 'जख्मी ' के दोहे और 7 प्रेम कविताएँ

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दोहे
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1.होने को होती रही ,तुमसे मेरी बात |
पर मैं कह पाया नहीँ ,दिल के ये जज्बात ||
2.यदि जीने की चाह है ,पहले तज अभिमान |
प्यासे को पानी पिला ,दे भूखे को दान||
3.ईश्वर को भी दे हिला , इसमेँ इतनी शक्ति |
नारी शक्ति अपार है ,जगवाले पहचान ||
4. है कौन ऐसा जग मेँ ,क्या बेटा क्या बाप|
सब स्वार्थ को पूज रहे ,सब मेँ है संताप ||

प्रेम कविताएँ
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1. (पागल प्रेमी)

मैं हद से भी ज्यादा
तुम्हेँ प्यार करता हूँ

ये जानते हुए भी कि
तुम खुशी हो किसी गैर की
तुम पर हक है
किसी और का
और पीछे मुड़कर
नहीँ देखोगी मेरी तरफ |

2.(वादा)

तुमसा दोस्त खोने के बाद
मेरे दिल का गुलशन
उजड़ जायेगा

मेरी हर खुशी बदल जाएगी
मातम मेँ
और मैं टूटकर
बिखर जाऊँगा

तुम्हेँ तो पता है
कि टूटा हुआ इंसान
जिन्दा नहीँ रह सकता

आज़ वादा करो
मुझे कभी तनहा नहीँ छोड़ोगे तुम |

3.(खामोशी)

ना तुम कुछ बोलती हो
ना मैं कुछ बोलता हूँ

दोनो लब दिल की बातेँ कहने को
बेताब हैँ

एक लब तुम्हारा है
और एक मेरा |

4.(मेरी चाहत)

मैं ज्यादा कुछ नहीँ चाहता
सिवा इसके
कि मुझे अपना समझा तुम

बसा लो अपने चित्त मेँ
बना लो अपनी माँग का सिन्दूर
और सजा लो
अपने जूड़े मेँ
गजरा बनाकर |

5. (अंजाम)

मैं जानता हूँ
तुम्हारे और मेरे बिछड़ने का वक्त

एक दिन जरूर आयेगा और
हम दोनोँ जुदा हो जायेँगे

हमारे वफ़ा के गुल
खिलने से पहले ही
मुरझा जायेँगे

क्योँकि ,
हर मुलाकात का अंजाम
सिर्फ
जुदाई होती है |

6.(कसम)

तुम्हारे नाम पे जीना तुम्हारे नाम पे मरना ,

सनम चाहूँ उमर भर मैं तुम्हारे साथ मेँ रहना |

तुम्हेँ अपना बनाने की कसम खाया दीवाना दिल,

सुना दो फैसला अपना तुम्हेँ जो कुछ भी हो कहना |

7. (लड़कियाँ)

लड़कियाँ नहीँ कर सकती
बराबरी लड़कों की
यह कहा होगा किसी
पागल ने

वर्तमान मेँ लड़कियाँ
लड़कोँ से
बहुत आगे हैँ |

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सागर यादव 'जख्मी '

नराननपुर,बदलापुर,जौनपुर,उत्तर प्रदेश |
मो. 8756146096

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(ऊपर का चित्र - सूर्य नारायण आचार्य, इंदौर की कलाकृति)

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