रविवार, 29 नवंबर 2015

सागर यादव 'जख्मी' की प्रेम कविताएँ

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1.  तुम बिन
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तुम बिन मैं जी ना पाऊँगा |

अपने इस छोटे से हृदय मेँ ,

जाने कितने ख्वाब सजाये

तोड़ जग के सारे बंधन ,

तुमसे हम सम्बन्ध बनाये

ये जहर-ए-जुदाई

किसी कीमत पे पी न सकूंगा ,

तुम बिन मैं जी ना सकूंगा |

मेरे जीवन के मालिक तुम हो,

मैं इक दरिया और
साहिल तुम हो

अपने दिल के घावोँ को

अश्कोँ से धो ना पाऊँगा ,

तुम बिन मै जी ना पाऊँगा |



2.तुम्हेँ देखने के बाद
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पल भर का भी सुख

मेरी किस्मत मेँ नहीँ

मगर ,तुम्हेँ देखने के बाद

मैं डूब जाता हूँ

तुम्हारे प्यार के अथाह सागर मेँ |

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सागर यादव 'जख्मी'

नरायनपुर,बदलापुर,जौनपुर,उत्तर प्रदेश,भारत |

मो.8756146096

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