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शशिकांत सिंह 'शशि' का लघु-व्यंग्य - नारद जी का इस्तीफा

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      ब्रह्मा जी ने नारद जी से रिपोर्टिंग ली-

-'' आर्यावर्त्त के चिंतक किन विषयों की चिंता कर रहे हैं ?''

-'' असहिष्णुता की प्रभु। उन्हें ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मनुष्य की स्वभावगत स्वतंत्रताएं छीन ली जायेंगी।''

-'' हूं.....गंभीर और चिंतनीय। क्या भारतभू के चिंतकों को कारागार में डाल दिया गया हैं ?''

-'' नहीं प्रभु। स्वतंत्र हैं।''

-'' क्या अकाशवाणी, दूरदर्शन, समाचारपत्र इत्यादि के समाचारों की पूर्वजांच की जाती है। अर्थात शासक अपनी पसंद नापसंद थोपते हैं ?

-'' मेरी जानकारी में तो ऐसा नहीं है तात।''

-'' असहिष्णुता का आधार !!

-'' एक समूह है स्वामी जो संस्कृति के नाम पर सड़कों पर गुंडागर्दी करता है। उसी के आधार पर..........।''

-'' परंतु नारद जी, एक समूह के आधार पर पूरे देश को............कमाल है आश्चर्यजनक। अच्छा, आर्यावर्त्त आजकल किन समस्याओं से जूझ रहा है ?''

-'' वही सनातन समस्याएं हैं स्वामी। महंगाई, विद्युतापूर्त्ति, परिवहन पथ, शिक्षा, स्वास्थ्य इत्यादि चिरनूतन समस्याएं हैं। ''

         ब्रह्मा जी की त्योरियों पर बल पड़ गया। क्रोध से कांपने लगे। उन्होंने फटकारते हुये कहा-

-'' नारद जी, हमें कर्त्तव्य पालन में असावधानी किंचित भी सहन नहीं होता। आप एक वरिष्ठ संवाददाता हैं। देवलोक में आपको ऋषि की उपाधि मिली हैं। आपको समस्याओं का ज्ञान नहीं है। यदि चिरनूतन समस्याएं हैं तो भारतभू पर टीपू सूल्तान पर बहस छिड़ी है। वहां आधारभूत समस्याओं की बहस कहां है ? टीपू सुल्तान की जयंती मनाने को लेकर बहस छिड़ी है। अर्थात, टीपू इस समय भारतभू की सबसे बड़ी समस्या है। आप सहिष्णुता की भी सतही जानकारी रखते हैं और समस्याओं की भी । यह देवलोक के लिए शुभ संकेत नहीं है। हमारे गुप्त किन्तु विश्वसनीय सूत्रों ने आपके आगमन के पूर्व ही हमें सूचना दी थी कि भारत की सबसे बड़ी समस्या टीपू सुल्तान हैं। ''

     इस फटकार से नारद जी आहत हो गये उन्होंने अपनी पूरी ईमानदारी से समाचार संचय किया था। संदेही समय हो गया है।  नारद जी आहत अवस्था में जाकर अपना इस्तीफा विधाता को सौंप आये जिसे मंजूर नहीं किया गया।

 

शशिकांत सिंह 'शशि'

                                                           

जवाहर नवोदय विद्यालय शंकरनगर नांदेड़ महाराष्ट्र, 431736

मोबाइल-7387311701

इमेल -

skantsingh28@gmail.com

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