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कामिनी कामायिनी का यात्रा संस्मरण - पेरिस ; एक सतरंगी ख़्वाब।

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एक स्वप्नमय , सुखमय ,और ताजगी का एहसास लिए हुए स्वागत के लिए तत्पर झिलमिलाता हुआ ,मुसकुराता हुआ  शहर है ,पेरिस ।  

  यह एक महान गरिमामय,दैदीप्यमान सांस्कृतिक विरासत लिए ,अतीत और वर्तमान दोनों को अपने विशाल भुजाओं में

समेटे ,सहेजे वर्तमान को ललकारता हुआ सा खड़ा है ।

सीन नदी के सिने पर इठलाता यह शहर फ्रांस की राजधानी है । कला,साहित्य ,शिल्प औरअपने  अनोखे शैली के लिए यह काफी प्रसिद्ध है ।

    दस्तावेज़ कहता है कि यहाँ रहने वाले आदिवासियों को पेरिसी कहा जाता था ,जिसके आधार  पर इस शहर का नाम पड़ा ।  तीसरी सदी में ढूँढी गई यह शहर 12वीं सदी तक आते आते पाश्चात्य जगत का एक विशाल शहर बन चुकी थी  , यह उन्नत व्यापारिक केंद्र ,और यूरोप महाद्वीप में प्रथम विश्व विद्यालय का जनक माना जाता है ।

फ्रांस की क्रांति के समय यह प्रमुख मंच था ।

पेरिस शहर को ‘सिटी ऑफ लाईट ‘ भी कहा जाता है क्योंकि यूरोप में सर्वप्रथम यहीं पर गैस स्ट्रीट लाईट प्रारम्भ  किया गया था ।

इस ऐतिहासिक शहर की गहरी पृष्ठ भूमि रही है। मशहूर फ्रांस की क्रांति के समय लुई 16 ,उसकी साम्राज्ञी ,मंत्री ,समर्थकों आदि को वरसाईल के महल से लाकर यहाँ पर गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया था ॥ आज यह जगह पर्यटकों के लिए दर्शनीय बना दिया गया है ।

एक महान सपूत  नेपोलियन बोनापार्ट के आने के बाद फ्रांस की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने लगी थी । नेपोलियन इस शहर से बे इंतहा प्यार करता था । वाटर लू की लड़ाई के बाद ,जब उसे   सेंट हेलेना द्वीप पर बंदी बना कर रखा गया ,तो उसने अपने वसीयत में आखिरी इच्छा के रूप में लिखा था कि मरने के बाद उसे सीन नदी के किनारे फ्रांसीसी लोगों के मध्य  ,पेरिस में दफनाया जाए । एक लंबे अंतराल और  काफी मशक्कत के बाद उसकी अस्थियाँ लाकर पेरिस में दफनाई गई । उस पर एक बुलंद भव्य इमारत बना दी गई है ,जहां आज  पुलिस भी तैनात रहते हैं । बाद में नेपोलियनके भतीजे ,नेपोलियान तृतीय ने आधुनिक पेरिस का रूप रंग संवारा था ।

  पेरिस का पेनोरमीक व्यू भी बहुत मनोहारी है । उसकी चौड़ी सड़कें ,ड्रेन सिस्टम , भवन निर्माण ,स्थापत्य कला ,सब कुछ चकित करने वाला है ।

   शहर में देखने योग्य कई महत्वपूर्ण स्थल भी हैं ,जहां वर्तमान के साथ भविष्य की सभ्यता और संस्कृति भी पल बढ़ रही होती है ।शहर के भीतर  कुछ प्रमुख दर्शनीय स्थान हैं ,

  ऐस्ट्रिक पार्क जो मशहूर कार्टूनिस्ट के कार्टून चरित्र को ध्यान में रख कर बहुत ही मनोरम बनाया गया है । 1989 में खुला यह पार्क प्राचीन सभ्यताओं {,रोमन ,यूनानी ,मिश्री }के भव्यता के साथ साथ बच्चों के चहेते कार्टून ,कहानियों ,जानवरों ,आदि की कथाएँ भी सहेजे हुए है ।यह अपने रोलर कोस्टर्स के लिए भी काफी प्रसिद्ध है । छुट्टियों के दिन तो यहाँ बेहद भीड़ होती है । यहाँ अनेक फिल्मों की ,सीरियलों की शूटिंग हो चुकी है ।

वैक्स म्यूजियम –वैसे यहाँ एक से बढ़ कर एक म्यूजियम है ,लुब्रा म्यूजियम ,कोनसेप्टऑफ म्यूजियम आदि आदि ॥यह म्यूजियम भी लाजवाब है ।मैडम टूसाद का लंदन में बना वैक्स म्यूजियम काफी प्रसिद्ध हुआ । इसी परिवार के लोगों ने [ उनकी भतीजी ] बाद में पेरिस में ऐसी म्यूजियम बनाई । इसमें संसार के अनेक गणमान्य हस्तियों के साथ महात्मा गांधी को देखकर अपना भारत महान की भावना से मन गौरवान्वित  हो उठता है ।

  एफिल टावर को आधुनिक पेरिस की शान कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ।

  फ्रांस की महान क्रांति के सौ वर्ष पूरे होने पर ,विश्व व्यापार मेला के उपलक्ष में इसे बनवाया गया था ।जिसे उस समय के ख्याति प्राप्त इंजीनियर अलेक्जेंडर गुस्ताव एफिल के टीम ने 31मार्च 1889 में पूरा किया था और उसी के नाम से यह विशाल टावर  जाना जाता है ।

  यह 324 मीटर ऊंचा है और इसका वजन 10,100 टन है ।अनेक टुकड़ों को जोड़ कर बना , चार पायों पर खड़ा ,इस जालिनुमा टावर पर चढ़ने के लिए 11665 सीढ़ियाँ भी बनाई गई हैं ,बहुत से लोग इसका भी उपयोग करते हैं ।लेकिन लिफ्ट भी लगे हैं ।तीन फ्लोर तक बना इस   टावर पर तीसरे तल तक  दर्शकों को ले जाया  जाता है प्रथम और दूसरे तल पर ,आहार , अल्पाहार आदि की भी व्यवस्था है {तीसरे तल तक जाने के लिए टिकट अलग से लेना पड़ता है }।लाखों दर्शक इसे देखने देश विदेश से आते हैं { यह भी दिलचस्प बात है कि तीसरे तल पर एफिल महाशय का छोटा सा अपार्टमेंट था जहां वे दोस्तों के साथ मनोरंजन करते थे ।}

हिटलर ने इसे उड़ाने का आदेश दिया था ,जिसे नहीं माना गया।

किसी समय यह विश्व का सबसे ऊंचा मनुष्य कृत ढांचा कहलाने का गौरव हासिल करता था ।टावर के ऊपर से पेरिस शहर का मनोरम दृश्य दिखाई पड़ता है ।इसके अगल बगल दूर दूर तक बहुमंजिला इमारत नहीं हैं। हाँ ,काफी दूर नए विकसित इलाकों में यह दिखाई पड़ती है । यहाँ आने के लिए अच्छा मौसम चुनना चाहिए ताकि दूर दूर तक दिखाई पड़े ।  इसे बनाने वाले सभी 72 इंजीनियरों ,वास्तुविदों का नाम इसके दीवार पर खुदा हुआ है । हर सातवें वर्ष इसकी पेंटिंग की जाती है जिसमें साठ टन पेंट की खपत होती है । यह रेडिओ टेलीविजन के क्षेत्र में बहुत ही महत्वपूर्ण काम कर रहा है । रात के समय विभिन्न प्रकार के बल्बों से रोशन इसकी छटा देखते ही बनती है ।

केन्द्रीय पेरिस में{ कैंप डी मार्स } स्थित यह टावर पेरिस का प्रमुख चिन्ह भी  है ।

   हिंदुस्तान के गेट वे ऑफ इंडिया  या इंडिया गेट जैसा आर्क डे ट्रिओंफे एक विशाल और भव्य द्वार है जिसे नेपोलियन ने अपने सैनिको के विजयोत्सव के लिए 1806 में बनवाने का आदेश दिया था ।मगर कुछ कारण वश इसका निर्माण कार्य रोक दिया गया ।नेपोलियन की यह इच्छा अधूरी ही रही  .1821 में उसकी मृत्यु हो गई ।बाद में 1836 में यह पूरा हुआ ।

   पास में ही विशाल नोट्रे डेम कथेड्रल है ,यहाँ भी पर्यटकों की विशाल भीड़ देखी जाती है ।

  पेरिस में अनेक भव्य इमारतें , अवेन्यूज़ स्मारकें और ऐतिहासिक स्थाने हैं ।प्रसिद्ध एवेन्यू  चम्प्स एल्यसीस अपने बड़े बड़े दुकानों ,होटलों रेस्त्रौ, लीटो  कैबरे  फैशन के सामान ,परफ्यूम और बहुत सारे अन्य चीजों के लिए विश्व प्रसिद्ध है ।

  रेवोलुशन स्कवेर {प्लेस डे ला रेवोल्यू सन} फ्रांस की क्रांति का एक भव्य स्मारक  रूपी स्थान है,जहां सम्राट लुई सोलह और उसकी साम्राज्ञी को फांसी दी गई थी ।

   ईशा की माता मेरी का चर्च नोत्रेडैम के समीप ही है ।

पेरिस में अनेक विश्वविद्यालय हैं ।यहाँ कालेजों में दो महीने की छुट्टी होती है ।  सड़क के किनारे किताबों की छोटी छोटी दुकानें हैं ,जहां 500साल पुरानी किताबें भी मिल जाती हैं यह इलाका भी नदी के किनारे है ।सीन नदी पर पुल कैदियों से बनवाया गया था {सड़कें ,सुरंग ,आदि भी कैदियों के मेहनत का ही फल है } नदी पर बना ओल्डेस्ट ब्रिज 500साल पुराना है जिसे अभी भी न्यू ब्रिज के नाम से ही जाना जाता है । नदी में बोटिंग करते पर्यटक  भारी संख्या में दिखाई पड़ते हैं ।वहाँ लोग साइकिल से भी बहुत प्रेम रखते हैं । तकरीबन  250 साल पुराना मिलिटरी अकेडमी की शानदार इमारत भी करीब ही खड़ी है । नेपोलियन ने यहीं पढ़ाई की थी ।

    नेपोलियन का कब्र  भी एक अत्यंत सुंदर स्थापत्य कला का  नमूना है । यहाँ सामने चौराहे पर {अवैध प्रवासी}अफ्रीकी ,बंगलादेशी लोग समान बेचते रहते हैं । जहां अक्सर पुलिस आते ही वे भाग खड़े होते हैं।{ ये लोग वहाँ के कानून व्यवस्था बनाने वालों के लिए सिर दर्द बने हुए हैं । }शरणार्थियों के लिए होम बॉक्स भी बनाए गए हैं ,जो कई स्थानों पर दृष्टिगोचर होते हैं ।

  यहाँ लोग काफी ,ड्रिंक्स आदि लेकर रेस्त्रा के सामने फुटपाथ पर रखे कुर्सियों पर बैठ दोस्तों से गप्पें मारते देखे जा सकते हैं । विश्व भर के सभी प्रकार के व्यंजनों का स्वाद यहाँ के होटलों में चखा जा सकता है ।

  यहाँ जन शौचालय की बहुत अच्छी व्यवस्था है । ब्राउन बॉक्स सड़क ,बाजार के किनारे स्थापित  हैं। रिंग रोड ,पेरिफेरिक रोड ,सर्कल स्कवेर आदि यहीं की देन  है । आधुनिक युग के  अर्बन प्लानिंग का यह आदर्श नमूना है । शहर में एक ऊंचाई की इमारतें ,इमारतों से लटकते फूलों के बास्केट ,चौड़ी गलियाँ ।नालियाँ ढँकी हुई ।{बहुत से पुरानी इमारतों को ढाह कर उसी शैली में उसे फिर से बनाया भी गया है } यहाँ रात में ही सड़कों ,नालियों की सफाई की जाती है । पोस्टर दीवारों पर नहीं लगाए जाते हैं { विशेष परिस्थिति में ,इसके लिए म्यूनिसपैलिटी का आदेश लेना अनिवार्य है }

  यहांके लोग बेहद कलाप्रेमी हैं । स्कूलों में कला विषय अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाती है ।कई ख्याति प्राप्त फ़ाईन आर्ट स्कूल हैं ।आर्किटेक्ट आदि का भी अक्सर प्रतियोगिता होती रहती है ।  यहाँ अक्सर फैशन शो होते रहते हैं ।कलाकारों का यहाँ सबसे ज्यादा सम्मान किया जाता है ।

  यहाँ से तकरीबन बीस बाईस मिल की दूरी पर {यह कम बेशी भी हो सकता है }मशहूर वरसायल का पैलेस है ।यह विशाल और अप्रतिम विलासिता से परिपूर्ण महल पर्यटकों को आश्चर्य चकित कर देती है । इस अनुपम ,अद्भुत कलाकृतिओ , वास्तुकला से भरे हुए महल का निर्माण फ्रांस के सम्राट लुई चौदहवें ने करवाया था । इसे देखने के लिए कम से कम आधा दिन तो चाहिए ही चाहिए ।

वास्तव में पेरिस एक शहर ही नहीं ,एक सभ्यता ,एक इतिहास ,एक संस्कृति भी है

 

       ॥ कामिनी कामायनी ॥ 

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