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नव साहित्यकार.कॉम की ओर से काव्य-गोष्ठी संपन्न

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डॉ.सुनील जाधव जी द्वारा आयोजित काव्य-गोष्ठी सम्पन्न


           नांदेड की पावन भूमि से निकलने वाली शोध, साहित्य, संस्कृति की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ‘’नवसाहित्यकार.कॉम’’ एवं नवसाहित्यकार प्रकाशन, नांदेड द्वारा दीपपर्व के अवसर पर तिथि १३/११/१५ की संध्या को नांदेड के प्रसिद्ध हिंदी साप्ताहिक  ‘’निर्णय मंच’’ के सम्पादक, कवि जयप्रकाश नागला जी की अध्यक्षता में मेघालय [शिलांग] से पधारे प्रसिद्ध कवि, साहित्यकार, डॉ.आकेला भाई, लोक साहित्य के कवि श्री.गुलाबसिंग जाधव, कवि, साहित्यकार डॉ.सुनील जाधव, कवि डॉ.संजयकुमार पंचाळ आदि की उपस्थिति में 
बड़ी धूम-धाम से हिंदी काव्य गोष्ठी सपंन्न हुई |


          कवि अकेला भाई जी ने अपनी कविता प्रस्तुत करने से पहले हिंदी की प्रमुख समस्या की ओर ध्यानाकर्षित करते हुए कहा ,’’ अब हिंदी के प्रचार की जरूरत नहीं हैं | बल्कि नागरी लिपि के प्रचार की जरूरत हैं | हिंदी अब काफी लोग बोलने लगे हैं, सिनेमा, दूरदर्शन,रेडियो, लेबर, कुली आदि के माध्यम से .| इन सब का हिंदी के विकास में योगदान रहा | लेकिन नागरी लिपि विलुप्त होते जा रही हैं | नागरी लिपि में लेखन नहीं हो रहा हैं | मल्टीनेशनल कम्पनी,सोशल मिडिया आदि में हिंदी की बात रोमन में लिखी जाती हैं| जिसका हम विरोध करते हैं | वरना हमारे धर्मग्रन्ध, सामजिक ग्रन्थ आदि रोमन में लिखना पड़ेगा क्योंकि आनेवाली पीढ़ी हमारी भाषा को समझ नहीं पायेगी |’’  इस प्रमुख समस्या के बाद आप ने हास्य व्यंग्य की कविता प्रस्तुत करते हुए सामजिक एवं भौतिक  विडम्बना को अभिव्यक्त करते हुए एक समा बाँध दिया था |

 उनकी कविताओं में  -


‘’डेढ़ क्विंटल चर्बी
डेढ़ किलो सोना
डेढ़ सौ ग्राम मेकअप लादे
गाती है सिठानी
प्रभुजी मेरो पीर हारो
पीछे खड़ी नौकरानी
मन ही मन मनाती हैं
प्रभुजी मेरी भी सुनलीजो
ऐसी पीर मुझे भी दीजो |’’


जैसी काव्य पंक्तियों ने श्रोताओं को लोट-पोट कर दिया |

आप की कविताओं के उपरांत लोकभाषा के कवि गुलाबसिंग जाधव जी ने बंजारा लोकगीत से श्रोताओं का ह्रदय को जीत लिया | लोकगीत के उपरांत काव्य-गोष्ठी के संयोजक कवि,साहित्यकार डॉ.सुनील जाधव जी ने अपनी कविता का आरम्भ  हिंदी की प्रशंसा परक गीत  से किया |


पग बढ़ा रही हैं हिंदी
आगे बढ़ रही हैं हिंदी
विश्व मस्तक पर
विराजमान हो रही हैं बिंदी
हिंदी
हिंदी हिंदी हिंदी हिंदी हिंदी |
इस गीत के उपरांत उन्होंने प्रसिद्ध कविता ‘माळीन गाँव’ प्रस्तुत की | जो कुछ वर्ष पहले पहाड़ ढहने से आधा गाँव मलबे में दब गया था और जिसमें मनुष्य के साथ पशु-पक्षी आदि का करुण अंत हुआ था | कविता माळीन गाँव के प्राकृतिक सौदर्य के साथ उसकी विभीषिका को व्यक्त करती हैं |


पर्वतों में बसा था
एक छोटा-सा गाँव
प्रकृति की सुन्दरता ने
जमाये थे ऐसे पाँव |
आसमा भी झुकता था
नत होता था वह गाँव
खूबसूरत था वह
माळीन नाम का गाँव |

माळीन गाँव कविता ने  श्रोताओं को मात्र मुग्द कर दिया था | जाधव जी के उपरांत संजयकुमार जी ने अपनी कविता से प्रभावित किया | अंत में जयप्रकाश नागला जी ने अध्यक्षीय भाषण करते हुए कहा कि, ‘’इस  काव्य-गोष्ठी के रूप में महाराष्ट्र में एक बहुत-बड़े  साहित्य एवं हिंदी प्रचार-प्रसार के  मिशन का आरम्भ हो रहा हैं | इसकी पहल संयोजक डॉ.सुनील जाधव जी ने कर दी  हैं, जो स्वागत योग्य हैं | आज हिंदीत्तर राज्यों में हिंदी पिछड़ रही हैं | अहिन्दी प्रदेशों को राष्ट्रीय प्रवाह में लाने का काम  सुनील जाधव जैसे व्यक्ति कर रहे हैं | जो महाराष्ट्र के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी | जससे हिंदी भाषी प्रदेश सिख लेंगे के हिंदी राष्ट्र को जोडती | सदभाव बनाती हैं |” और अंत में अपनी कविताओं से रसास्निग्ध किया | आपकी कविता आधुनिक जीवन का बदलता परिवेश एवं  विसंगत स्थति को अभिव्यक्त करती हैं | आप ने अपनी प्रसिद्ध कविता ‘’ एक रुपया चाँदी का, देश हमारा गाँधी का “ के माध्यम से व्यंग्य शैली में वास्तविकता के दर्शन करवायें |

 
खून खराबा कर्फ्यू दंगा
आदमी हो गया कितना नागा
राम जी से कौन कहे अब
कितनी मैली हो गई गँगा |
हवाओं ने संकेत दिए हैं
आना निश्चित आँधी का
एक रुपया चाँदी का
देश हमारा गाँधी का |

काव्य-गोष्ठी का समापन आपकी इस प्रसिद्ध कविता से हुआ | कार्यक्रम के आरंभ में हिंदी प्रचार-प्रसार एवं साहित्यक योदान हेतु अकेला भाई, जयप्रकाश नागला जी, संजयकुमार जी को नव साहित्यकार की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया | अंत में संजयकुमार जी ने कार्यक्रम के आभार का दायित्व सम्भाला |

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