शनिवार, 7 नवंबर 2015

श्याम यादव का व्यंग्य - सोशल मीडिया की टिप्पणी

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सोशल मीडिया के आने के बाद अब टिप्पणी करना बहुत ही आसान हो गया है। जब चाहे, जहां चाहे, जैसे चाहे वैसी टिप्पणी करने से आपको कोई नहीं रोक सकता । स्वाभाविक मानवीय प्रक्रिया होने के कारण इस धरती पर जब तक मानव नामक ये प्राणी रहेगा टिप्पणियां करने की इस तरह की प्रवृत्ति जारी रहेगी । वैसे सोशल मीडिया में की जाने वाली टिप्पणी को ट्वीट भी कहते है ।इन टिप्पणी करने वाले महानुभावों का उस विषय से कोई लेना देना नहीं होता जिस पर ये टिप्पणियां कर रहे होते है। सोशल मीडिया पर इस तरह की गई टिप्पणियों से कुछ हो ना हो मगर हंगामा जल्दी मच जाता है।

सोशल मीडिया की इन टिप्पणियों असर कभी तुरन्त हो जाता है और कभी नहीं भी होता टिप्पणियों पर यदि सकारात्मक प्रतिक्रिया आये तो ठीक और नकारात्मक आये तो उसे हटाने या वापस लेने की भी सुविधा सोशल मीडिया पर है । टिप्पणियां करने की ये परम्परा हमारे देश में प्राचीनतम समय से चली आ रही । यदि इतिहास का पन्ना पलटा जाय तो इन टिप्पणियां की मार बडी ही खतरनाक रही है । आप याद करें महाभारत का युद्ध होता, यदि द्रोपदी दुर्योधन पर टिप्पणी नहीं करती । अगर ऐसा नहीं होता तो हम गीता जैसे महान ग्रंथ से वंचित रह जाते । इसी तरह मर्यादा पुरूषोत्तम राजा राम ने अपनी पत्नी रानी सीता को एक टिप्पणी के कारण ही राजमहल से निष्कासित किया था। पत्नी के प्रेम में आशक्त तुलसीदास पर यदि उनकी पत्नी ने टिप्पणी नहीं की होती तो क्या हमें आज रामचरित मानस जैसा ग्रंथ मिल पाता ।

इतिहास को हम छोड़ भी दें मगर टिप्पणियां नहीं छोड़ सकते । कुछ टिप्पणियां ऐतिहासिक हो जाती है । कुछ प्रासंगिक होती है तो कुछ अप्रसांगिक और कुछ राजनीतिक । लेकिन टिप्पणी टिप्पणी होती है। टिप्पणियां करना हमारे दैनिक दिनचर्या का अभिन्न अंग बन गया हैं। ये बात और है कि टिप्पणियां देश काल परिस्थियों के साथ साथ उम्र के हिसाब से की जाती हैं । कुछ टिप्पणियां मर्यादा के भीतर होती हैं और कुछ मर्यादा के बाहर । संसद में भी ये प्रयोग में लाई जाती हैं और इस तरह की टिप्पणियों पर वहॉ हंगामा मचाने के लिए काफी होती हैं । कुछ टिप्पणियां को जिन्हे असंसदीय करार दिया जाता है उसे कार्यवाही से निकालने का चलन भी है। मनचलों द्वारा की जाने वाली टिप्पणियॉं पुलिस की शरण में भी ले जाने में सक्षम होती हैं

संसद से सडक तक प्रचलन मे आने वाली इन टिप्पणियों को जब से सोशल मीडिया का सहारा मिला है ,ये आम हो गई ,बावजूद इसके टिप्पणियां करना सबके लिए आसान नहीं होता । कुछ लोग होते हैं जिन्हे इस काम में महारथ हॉंसिल होती है। ये टिप्पणीकर्ता जब चाहे जहॉं चाहे किसी भी विषय पर टिप्पणी करने को तैयार रहते हैं या यूं कहा जाय कि ये टिप्पणीकर्ता टिप्पणी करने के बहाने ढूढा करते हैं और जैसे ही मौका मिलता है ये टीवी चैनलों में अपना मुंह खोल देते है । रानीतिक हलकों में तो टिप्पणीकर्ता की बाकायदा नियुक्ति होती हैं। उनका काम ही बस इस तरह की टिप्पणी करना होता है। इस तरह की टिप्पणियों का असर जब उलटा होने लगता है तो ये टिप्पणीकर्ता तुरंत अपनी टिप्पणी से पलट जाने की क्षमता रखते हैं और मीडिया पर सारा दोष डाल देते है कि मेरी टिप्पणी को गलत अर्थ लगाया गया ।

टिप्पणी का अर्थ गलत हो या सही मगर उस सरकारी मुलाजिम से पूछो जिसकी गोपनीय चरित्रावली में उसके बास द्वारा की गई नकारात्मक टिप्पणियों का क्या असर होता है। इस तरह की ये लाल टिप्पणियॉं उन टिप्पणियों का परिणाम होती है जो कर्मचारी अपने बॉस के खिलाफ यहॉं वहॉं कर रहा होता है। प्रमोशन की बात दूर उसका तो नगद का भी नुकसान हो जाता है। वैसे भी टिप्पणी करने की क्षमता हर किसी में नहीं होती । मगर टिप्पणी करने मे पत्नियां। सदैव आगे रहती हैं । पडोसन की साडी से ले कर उसके रंग रूप से कर उठने बैठने और भी न जाने किस किस चीज पर कैसी कैसी टिप्पणी कर देती है कि उनको बताने में भी शरम आ जाएं। टिप्पणी करने का अपना अलग ही मजा है ।आप चाहे तो आप भी टिप्पणी कर सकते है मगर मैं तो इससे दूर ही रहना चाहूँगा ।

©श्याम यादव २२ बी, संचार नगर एक्सटेंशन इंदौर 452016

 
 
 
 

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