विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

सुमन त्यागी "आकाँक्षी" का व्यंग्य - जंग जारी है

image

जंग जारी है

पर्वों के इस सीजन में एक और पर्व है जो आज -कल अपने चरम पर है सोच में पढ गये क्या ? सोचना भी चाहिए पर्व ही कुछ ऐसा है ,"लौटाऊ पर्व "। कुछ शर्तों का पालन करते हुए आप भी इस पर्व को बड़ी धूम -धाम से मना सकते हैं। इस पर्व को मनाते समय आप जो चाहे लौटा सकते है-पदक ,अलंकरण,उपाधि,पुरस्कार,उपहार,सरनेम और न जाने क्या -क्या बशर्ते आपके द्वारा लौटाई गई वस्तु(या जो भी आप लौटाना चाहे) के एवज में धन वापसी (money back) न हो। अर्थात आपको सिर्फ मुफ़्त में प्राप्त (रुपयों से न खरीदी गई ? ) वस्तुएं ही लौटानी हैं।

आज-कल अपनी कॉलोनी में भी इस पर्व की धूम है। हुआ यूँ कि श्री झुनझुना सिंह जी की धर्मपत्नी आज के ज़माने की महिला हैं (फेसबुक ,ट्विटर,व्हाट्सएप्प पर एक्टिव ) और महिलाओं से सम्बंधित सभी मामलों (केटरीना की साडी ,करीना की नेलपेंट ऎश्वर्या की करवाचौथ आदि ) पर तीखी नजर रखती हैं ।और इन सब का नियमित स्रोत है टेलीविज़न। खैर इसी नियमित स्रोत की बदौलत ही उनको "पुरस्कार लोटाऊ" पर्व की जानकारी हुई। चूँकि श्रीमती झुनझुना सिंह कॉलोनी के महिला मोर्चा (मोर्चा का काम किट्टीपार्टी और टीवी सीरियल पर बहस तक सीमित है) की अध्यक्षा हैं । अतः इस गौरवपूर्ण पद की गरिमा को बनाये रखते हुए "लौटाउ पर्व" मनाने सम्बन्धी अभूतपूर्व फैसले की उम्मीद तो उनसे की ही जा सकती है। आख़िरकार "लोटाऊ पर्व "मनाने का फैसला हो ही गया। जैसा की टीवी से ज्ञात हुआ पर्व के शुभारम्भ के लिए बाक़ायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस(लोकल अखबार) बुलाई गई। पर्व का सुभारम्भ कुछ इस प्रकार है," मैं तारा झुनझुना सिंह कॉलोनी में व्याप्त असहिष्णुता के प्रति अपने पति (?)द्वारा एक भी शब्द न कहे जाने के विरोध में आज ,अभी, इसीवक्त अपना सरनेम , मंगलसूत्र सहित (जो सरनेम के साथ मिला ) अपने पति को लौटाती हूँ।

प्रेस कॉन्फ्रेंस अगले दिन सभी के घरों में मुख्य चर्चा का विषय बन गई। उसके बाद तो रोजाना दो-चार कॉन्फ्रेंस हो ही जाती है। ठंठानपाल, हरहरमाल, जिकाजंजाल और न जाने कितने सरनेम मंगलसूत्र सहित या मंगलसूत्र रहित लौटाए जा रहे हैं। वैसे भी भेड़ सर्वप्रिय पशु है। "लोटाऊ पर्व" चरम पर है। लेकिन जिस तरह संक्रांति पर पतंग उड़ाने के, दीपावली पर पटाखे छोड़ने के, होली पर रंगों से खेलने के विरोधी कुकुरमुत्तों की तरह उग आते हैं। उसी प्रकार "लोटाऊ पर्व" पर लौटाने के विरोधी पैदा हो ही गए। "लोटाऊओं" के लौटाने के विरोध में " विरोधियों" ने भी अपना संघ बना लिया है। दोनों तरफ का माहौल गर्म है।"विरोधियों" के अपने तर्क हैं तो "लोटाउओं" के अपने।

"लोटाउओं"के तर्क कुछ इस तरह हैं-

1.इस स्थिति में चुप रहना शर्म की बात है। जो मुखर नही हैं उनका कुछ न कुछ स्वार्थ छिपा है।

2.हम इस कॉलोनी के जागरूक नागरिक हैं,कॉलोनी का भविष्य हमारे कन्धों पर है(?) ।

3.कॉलोनी का माहौल साँस लेने लायक भी नहीं है।(इनका वायु प्रदुषण से कोई सम्बन्ध नहीं है)

वहीँ "विरोधियों" के तर्क इस प्रकार है-

1."लोटाउओं" में कुछ अभी भी मिसेज गुड़गोपाल, मिसेज रोतालाल, मिसेज फटेहाल आदि नामों का उपयोग कर रही हैं तथा ये आपस में भी इन्ही नामों का प्रयोग करती हैं।

2."लोटाउओं" में से कुछ के गले में अभी भी मंगलसूत्र है जबकि उसे लौटाने की घोषणा की थी।

3.जब "लोटाउओं" को सरनेम की जरुरत थी तब तो इन्होंने न जाने कितने जतन (व्रत, प्रार्थना,भेंट,उपहार,धोक देना) किये। अब चूँकि ये स्थापित हो गए हैं तो लौटा रहे हैं।

4."लोटाउओं" द्वारा सरनेम और मंगल सूत्र के साथ मिले मान-सम्मान को भी वापस करना चाहिए।

5.अब चूँकि मंगलसूत्र पुराना एवं बेकार हो गया है उसके स्थान पर उस समय की बाजार कीमत( खर्च) पर ब्याज जोड़ कर धन वापस किया जाये।

बरहाल"लोटाउओं"पर "विरोधियों" के तो "विरोधियों" पर "लोटाउओं" के तर्कों के जवाब देने का समय नहीं है। दोनों तरफ से राग जारी है। इन सब के बीच भी कुछ है-क्या अब मिसेज-मिसेज कहना बंद जो जायेगा ? क्या अब किसी के गले में मंगलसूत्र नहीं होगा ? क्या अब "लोटाऊ अपने पति के साथ नहीं रहेंगी ? क्या "लोटाऊ"और "विरोधी" पहले जैसे पडोसी नहीं बनेंगे ? प्रश्न अनेक हैं और उत्तर एक भी नहीं। कॉलोनी जंग का मैदान बन चुकी है, जंग जारी है।

सुमन त्यागी"आकाँक्षी"

मनियाँ, धौलपुर

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget