रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

सागर यादव 'जख्मी ' की ताजा प्रेम कविताएँ

1 . फिर लौट के आना  (कविता)


कहाँ हो तुम ?
मुझे छोड़कर जाने वाले

हो सके तो फिर लौटकर आना
आँखेँ मेरी पलकेँ बिछाये बैठी हैँ
तुम्हारे इंतजार मेँ

तुम क्या गए
मेरा संसार सूना हो गया
मेरे कान मेँ
गूँजती हैँ आज भी तेरी कोयल सी बोली
आज भी सजी है तेरी तस्वीर
मेरे दिल के फ्रेम मेँ

तेरे जाने के बाद
मुझे चाहने वाले तो
बहुत मिले

पर , मिला न कोई
तेरे जैसा
जाने वाले हो सके तो
फिर लौट कर आना |


2. वक्त की सीख (गजल )


हर किसी से प्यार करना

मत कभी इनकार करना |

हो गई जो गल्तियाँ तो

मन से सब स्वीकार करना |

मत छुपाकर दिल मेँ रक्खो

इश्क का इज़हार करना |

वक्त ने मुझको सिखाया

अपनो पे भी वार करना |


------------
1. (सुनहरे सपने)

बहुत कुछ
मै लिखना चाहता हूँ
तुम्हारे लिए
तुम्हारे प्यार के लिए

कुछ कविता
कुछ गीत
कुछ गजल
कुछ प्रेमपत्र

हाँ ! मै देखना चाहता हूँ
कुछ सुनहरे सपने

पर,जिनके सच होने की
कोई उम्मीद हो |


2. (आँसू)

  तुम्हारी हँसी मेँ बसी है
हमारी हँसी

तुम्हारे रोने से
डबडबाने लगती हैँ आँखेँ मेरी

तुम्हारे लिए
तुम्हारे आँसू महज पानी होँगे

लेकिन मेरे लिए
वे अनमोल मोती हैँ |

3.(कैसे भुलाऊँ तुम्हेँ )

तुम्हेँ भूलने की अगर
एक छोटी सी भी कोशिश करूँ तो ....
मुझे मौत आ जाती है

याद आने लगते हैँ
वो लम्हेँ
जिन्हेँ तुम्हारे साथ गुजारा

तड़पने लगता है दिल
डबडबाने लगती हैँ

अब तुम ही बताओ
कैसे भुलाऊँ तुम्हेँ ?

4.(तुम्हारी यादेँ )


तुम्हारी यादेँ
मेरा पीछा नहीँ छोड़ती

जैसे ,फूलोँ के संग खुशबू
सूरज के संग किरण

ठीक वैसे ही
तुम्हारी यादेँ बस गई हैँ
मेरे तन-मन मेँ |

5. (तुझको भुला दूंगा )

मेरा दिल तोड़कर जाने वाले
जा तू भी तरसे प्यार को

तेरी आँखोँ को कभी
नीँद नसीब न हो

काँटोँ का जाल लगे तुझको
तेरी फूलोँ की शैय्या

तेरे हर हसीन ख्वाब
मेरी दर्द भरी चीखेँ सुनकर
टुकड़े -टुकड़े हो जायेँ

जा बेवफा ! जा!!
मै तुझको भुला दूंगा |

6. (गम-ए -जुदाई)

जब तुम मुझे छोड़कर
जाने लगती हो
तो जाने कैसा
महसूस होता है

जैसे , मै पी रहा हूँ कोई
जहर का प्याला
और मेरी मृत्यु
निकट है

ऐ मेरी दिलरुबा !
ज्यादा देर न सही
बस एक पल ही ठहर जा

मै जीभर कर तेरा दीदार कर लूँ
अपनी आँखोँ मेँ दफ्न कर दूँ
तेरे चेहरे को

सहला लूँ तुम्हारे
रेशमी बालोँ को
और चूम लूँ तुम्हारे
अमृत भरे रसीले होठोँ को

फिर तुम शौक से चली जाना |

--------------


सागर यादव 'जख्मी '

नरायनपुर,बदलापुर,जौनपुर,उत्तर प्रदेश

मो.8756146096

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

रचनाकार में ढूंढें...

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

randompost

कहानियाँ

[कहानी][column1]

हास्य-व्यंग्य

[व्यंग्य][column1]

लघुकथाएँ

[लघुकथा][column1]

कविताएँ

[कविता][column1]

बाल कथाएँ

[बाल कथा][column1]

लोककथाएँ

[लोककथा][column1]

उपन्यास

[उपन्यास][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][column1][http://raviratlami.blogspot.com]

वर्ग पहेलियाँ

[आसान][column1][http://vargapaheli.blogspot.com]
[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget