मंगलवार, 3 नवंबर 2015

रवि श्रीवास्तव की कविता - माहौल देश का है गरमाया

image

माहौल देश का

देश का है माहौल गरमाया,

कहकर लोगों ने सम्मान लौटाया.

कभी बीफ का मुद्दा आया,

कभी जातिवाद से, ध्यान भटकाया.

 

क्या यही चुनावी मुद्दे है,

क्या यही विकास की बातें हैं

एक दूसरे को कोसने को,

डिबेट में बैठ वो जाते हैं.

 

क्या परिभाषा है विकास की,

कहां रहे अब तक खोए,

इतने दिन तक राज किए थे,

फिर भी गरीब, भूखे नंगे सोए.

 

रही बात हिंसा को लेकर,

पिछली सरकार में भी हुआ.

मिलकर रहे आपस में हम,

ईश्वर से यही करता हूं दुआ.

 

वाणी पर संयम रखे वो,

जिन पर जिम्मेदारी है.

मूर्ख न समझो, यहां किसी को,

समझदार ये जनता सारी है.

 

जो काम नहीं कर पाई गोली,

वो बोली से हो रहा है.

यही सोचकर देश का पड़ोसी,

मन ही मन खुश हो रहा है.

 

देश तरक्की करेगा जब,

मिलकर साथ चलेंगे हम.

इतना भी सरकार को न कोसों,

फर्ज भी अपना निभाओ तुम.

 

पेड़ हमेशा देता सबको

बिना भेदभाव के तो छाया.

देश का है माहौल गरमाया,

कहकर लोगों ने सम्मान लौटाया.

--

image

रवि श्रीवास्तव

लेखक, कवि, व्यंगकार.

ravi21dec1987@gmail.com

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------