गुरुवार, 19 नवंबर 2015

मनोज मोक्षेन्द्र की कहानी - 'भूख भड़सांय' का पाठ

मनोज मोक्षेन्द्र : इस कहानी के बारे में मैं दो-शब्द कहना चाहूंगाः एक बार मशहूर कथाकार संजीव ने टेलीफोन पर बात करते समय मुझसे कहा था कि भूख और बेकारी पर आजकल कहानियाँ नहीं लिखी जा रही हैं। तब मैंने कहा था कि भूख और बेकारी पर इस कहानी से अधिक मार्मिक कोई और कहानी विरले ही हो सकती है। इसके अतिरिक्त मेरी कई और कहानियाँ भी भूख, बेकारी, बेग़ारी और ग़रीबी पर केंद्रित हैं

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