रविवार, 29 नवंबर 2015

सुमन त्यागी 'आकाँक्षी' की कविता - मैं भी छोड़ूं देश, ये अरमान आया

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               देश का सम्मान


शब्द-शब्द के जाल से
छोड़ूँ ,देश अरमान आया

मारो-मारो ,काटो-काटो
शब्दों का शैलाब आया

सच में है,या फिर भ्रम
असहिष्णुता का आसमान छाया

जब तक पाया जुड़ा रहा
अब मन में बेईमान आया

कल तक रहा 'अतुल्य ' बना
अब उसका अपमान आया

रणछोड़ तो बन जाऊँ
पर,मन में राष्ट्रगान आया

जब तक जिन्दा डटे रहो
दिल से यह फरमान आया

सब धर्मों के भेद भुला
एक राष्ट्र आह्वान आया

मन से मन और दिल से दिल
मिलवाने का अभियान आया

सीधे-सादे जज्बे में
देशभक्त का स्वाभिमान आया

रोम-रोम के पुलकन में
देश का सम्मान आया
देश का सम्मान आया

 

सुमन त्यागी 'आकाँक्षी'
मनियाँ ,धौलपुर (राज)

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