शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

सागर यादव 'जख्मी ' की लघुकथा - फ़ोटो

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"फोटो"
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पहली कक्षा के बच्चोँ को पढ़ाने के बाद मैं ज्योँ ही दूसरी कक्षा मेँ
प्रवेश किया तो मेरी नजर एक सात वर्षीय लड़की पर जा टिकी | गोरा रंग,भूरे
बाल ,साधारण कपड़े |
"तुम्हारा नाम क्या है ?" मैने पूछा |
बालिका ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया ," अर्पिता मिश्रा |"तुम्हारा घर कहाँ है ?"
"बेदौली , मितावाँ ,जौनपुर |"
"तुम्हारे पिता क्या करते हैँ ?"
"ड्राईवर हैँ |"
"क्या आप मुझसे दोस्ती करेँगे ?" कहकर बालिका ने प्यार से मेरी तरफ अपने
नन्हेँ पंजे बढ़ा दिए |उसका भोलापन देखकर मैं भी अपने आपको रोक न पाया
|मैंने उसका हाथ अपने हाथ मेँ लेते हुए जवाब दिया ,"हाँ , अगर कभी न
टूटने वाली दोस्ती करोगी तो जरूर करूँगा |"
"मैं तो कभी नहीँ तोड़ूँगी ,जब तक ये जीवन रहेगा |छोटी मुँह बड़ी बात | उस
नन्ही सी बालिका की करुणा भरी बातेँ सुनकर मै चकित रह गया | कुछ दिन
पश्चात् हम दोनोँ की दोस्ती ऐसी रंग लायी कि पूरा स्कूल हमारी दोस्ती का
लोहा मानने लगा |इस घटना को लगभग एक वर्ष बीत गए |ग्रीष्मावकाश हुआ |न
चाहते हुए हम दोनोँ को एक दूसरे से अलग होना पड़ा |

जुलाई का महीना है |स्कूल खुल चुके हैँ |अर्पिता ने तीसरी कक्षा मेँ
प्रवेश लिया |मेरा मुरझाया हुआ चेहरा खिला कमल हो गया |मेरी आँखोँ से
खुशी के आँसू निकल पड़े |मैने दौड़कर उसे अपनी गोद मेँ उठा लिया | कुछ देर
बाद जब वह जाने लगी ,मैने बिना देर किए फूल की पंखुड़ी की- सी उसकी कोमल
कलाई को अपने पत्थर जैसे हाथोँ से पकड़ लिया और पूछा ,"तुम मुझे याद करती
थी ,इसका क्या सबूत है तुम्हारे पास ?"
अर्पिता थोड़ी देर चुप रही फिर अपने बैग मेँ से मेरा फोटो निकालकर मेरे
हाथ मेँ रख दी और बोली ," जब घर का कोई सदस्य मुझे डाँटता-मारता था तो
मैं अकेले मेँ रोती थी और आपकी फोटो देखकर ऐसा महसूस करती थी कि आप मेरे
साथ हैँ |फिर मैं चुप हो जाती थी |

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सागर यादव 'जख्मी '

नरायनपुर ,बदलापुर ,जौनपुर ,उत्तर प्रदेश |
मो . 8756146096

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