अक्षय आजाद भण्डारी की दीवाली कविता - रंगोली

मैं हूँ , मेरा मातृभूमि पर सन्देश देना ही कार्य है

मैं रंगोली हूँ , मेरा मातृभूमि पर देना ही कार्य है।

मैं मातृभूमि को सजाकर

उम्मीदों के रंग भरती हूँ ,

गोली रंगों से

सजकर मातृभूमि को

श्रृंगारित करती हूँ।

मैं रंगोली हूँ मेरा मातृभूमि पर सन्देश देना ही कार्य है।

 

है मुझको आशा मैं रंगोली

सजकर कुछ कहती हूँ ,

मैं कभी कुछ तस्वीर बनकर

तो कभी बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ

कभी स्वच्छता तो कभी पर्यावरण बचाओ

का सन्देश देती हूँ ,

पर किसके आंगन की शान बनकर

कभी किसी की आवाज बनती हूँ।

मैं रंगोली हूँ , मेरा मातृभूमि पर सन्देश देना ही कार्य है।

image

नाम अक्षय आजाद भण्डारी। शिक्षा BJMC कोर्स जारी है। जन्मस्थान राजगढ़ तहसील सरदारपुर जिला धार मध्यप्रदेश, जन्मतिथि 13 अक्टूबर 1993, कई वर्षो से पत्रकारिता क्षेत्र में कार्य जारी। मों.9893711820 , ई मेल bhandari.akshjay11@gmail.com.

टिप्पणियाँ

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.