रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

राजेन्द्र नागदेव की कविता - हत्या

image  

   -

अँधेरा इतना भी नहीं था
कि कुछ दिखाई न दे
सूरज डूबा अभी-अभी ही था
फिर भी सब कुछ दिखाई देना बंद हो गया अचानक
दीवारें काली हो गईं जैसे कोलतार से पुती हों
अँधेरे में ढूँढ रहा है कोई कलम
कागज का एक टुकड़ा
और शब्द जो दूसरों के नहीं उसके अपने हैं

कलम की नोक में बाकी है अभी अणु बराबर सूरज
लगता है तलवारों से भरा कोई तलघर है
जब भी टटोलता है अपने शब्द अँधेरे में
हाथ कंधों से कट कर अलग हो जाते हैं
उंगलियाँ छिटक कर दूर गिर जाती हैं

अखबार अत्यंत धीमी आवाज़ में फुसफुसाता है-
एक कलम की हत्या हुई है कल
शेष सब ठीक है,
संतप्त हवा चकित है विसंगति पर।
*                  *                   *
                                  
                         राजेन्द्र नागदेव
                         डी के 2 – 166/18, दानिशकुंज
                         कोलार रोड
                         भोपाल- 462042
            फो 0755 2411838  मो 8989569036
         --

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget