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डाक्टर चंद जैन "अंकुर " की दीवाली कविता - आज दिवाली है

आज दिवाली है

बंद करो बारूद फटाका आज दिवाली है
राम राज्य का दीप जलाओ आज दिवाली है

उग्रवाद का शौक न पालो आज दीवाली है
अंधेरों को दूर भगाओ आज दिवाली है
घर आंगन में दिया जलाओं आज दीवाली है

बंद करो बारूद फटाका आज दिवाली है
राम राज्य का दीप जलाओ आज दिवाली है

रंगों की ओली से सारा घर और देश सजाओं
मंदिर ,गिरजा और गुरुद्वारा में भी दीप जलाओं
हो मस्जिद से आज़ान अमन का आज दिवाली है

बंद करो बारूद फटाका आज दिवाली है
राम राज्य का दीप जलाओ आज दिवाली है

दीवाली की रातों में मैंने माताओं को डरते देखा है
बारूद धमाकों के गंधों से ह्रदय घात तक होता है
गर्भ पतन का खेल न खेलो आज दिवाली है

बंद करो बारूद फटका आज दिवाली है
राम राज्य का दीप जलाओ आज दिवाली है

ये कैसा है शौंक सनातन के वंशज का
छोटे छोटे जीवो और पखेरू में दहशत का
सब जीवों से प्रेम बढ़ा लो आज दिवाली है

बंद करो बारूद फटाका आज दिवाली है
राम राज्य का दीप जलाओ आज दिवाली है

सुनना है तो आवाज़ सुनों पायल के रुनझुन गीतों का
झरनों के कल कल में सुन लो मीत मिलन संगीतों का
ये अमावस की रात, सितारों से करलो बात दिवाली है

बंद करो बारूद फटका आज दिवाली है
राम राज्य का दीप जलाओ आज दिवाली है

ग़र तुम हो मजबूर बारूद धमाकों के उत्सव का
सरहद में जाकर ज़ोर दीखाओं आज दिवाली है
ना घर के अंदर आग लगाओ आज दिवाली है

बंद करो बारूद फटका आज दिवाली है

राम राज्य का दीप जलाओ आज दिवाली है

डाक्टर चंद जैन "अंकुर "

रायपुर

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