रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

लक्ष्मीकांत बैष्णव , रायपुर की कविताएँ

image

टिम टिम जलता दीपक

स्तब्ध वातावरण
गहन अंधकार में
टिमटिम जलता दीपक को देखा ,
तो पाया कि
उसके चारों ओर
प्रकाश का एक वृत्त है
जो धीरे धीरे
धुंधला होता हुआ
अंधकार के विशाल घेरे में
पड़ा रो रहा है
उस वृत्त प्रकाश के चारों ओर
पाषाण सा विशाल
अंतहीन अंधेरा
उसे बुरी तरह दबाए हुए है
दीपक की लौ तूफानी झोंकों से
पल भर को कांप जाती है
तो अंधेरा खिसककर
उसके निकट आ जाती है
तम की विशाल सेना
मानों पूरी तरह तैयार
और चौकस खड़ी है
कि वह दीपक कब बुझे
और एकदम से वे
धावा बोलकर
अपने राज्य के
कटे छटे भाग पर
अपना आधिपत्य जमा ले

---

विवशता
हमारे सम्बंध
सिमटकर
कितने बौने हो गए हैं
कि सिर्फ
पत्रों के आदान प्रदान
तक ही उनकी सीमा है
एक दूसरे के
आड़े वक्त में
काम आने वालों का स्वर
अत्यंत धीमा है
हमने अपने इर्द गिर्द
बुन लिए हैं इतनी
व्यस्तता के जालें
कि मकड़ी की भांति
उन्ही में फंसकर
रह गए हैं
हाय !
हम कितने असहज
और अमानवीय हो गए हैं ।
--

लक्ष्मीकांत बैष्णव , रायपुर

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget