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नंदलाल भारती की दीवाली की कविता - दीपदान

दीपदान महोत्सव(कविता )

उजियारे का उत्सव,दीपदान महोत्सव 

अशोक महान को याद कर 

उनकी राहों पर चलने की 

प्रतिज्ञा दोहराने का दिन आज

धो दे  अन्तर्मन के सारे दाग आज 

कुसुमित हो उठे स्व-मान के हर साज 

आओ एक दीया ऐसा जलायें 

हर ले हर जो  अंधियारा 

सद्प्रेम के नाम एक दीया जलायें 

जहां में बसा रहे  हरदम  उजियारा 

परमार्थ के नाम दीया एक जलायें 

इंसानियत की उभर जाए निखार 

बसुधैव कुटुम्बकम के नाम एक दीया

उमड़ा रहे सदा  बंधुत्वप्रेम और 

समता-सदभाव की  रसधार 

प्रकृति के नाम भी एक दीया

जीवन का है जो सार 

बहुजन - हिताय ,बहुजन सुखाय के  नाम 

एक दीया जरूर जलायें 

मानव -मन कह उठे आभार 

दीया एक ,राष्ट्र धर्म के नाम जलायें 

बन जाए दुनिया का उजियारा 

मन्नत अपनी जहां के लिए अपनी 

समता-सदभावना,विकास राष्ट्रप्रेम में 

रहे हर्षित हर मन 

सच यही आराधना 

दीपदान महोत्सव(दीपावली) की 

बहुत- बहुत बधाई 

और

हार्दिक शुभकामना………………। 

डॉ नन्द लाल भारती 

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