रविवार, 8 नवंबर 2015

अक्षय आजाद भंडारी की दीवाली की कविता

ये दिवाली की रांगोली

दिवाली आई है 

उमंग हृदय में भरकर कुछ कहने आई है

कहती कुछ दिवाली की रांगोली कुछ  

संदेशा लेकर आई है।

मन में आशा भरकर धर्म के साथ भाईचारा फैला दो 

ज्ञान का दीपक मन में प्रकाश फैलाए

घर - घर एक संदेशा फैला दो।

रंगों से भरी रांगोली पटाखों पर कहती है कुछ

पटाखे करते प्रदूषण , अपनी मातृभूमि की सुनो पुकार 

हर घर घर खुशियों हो जाए,

ये दिवाली की रांगोली कुछ कहने आई है।

 

अक्षय आजाद भण्डारी राजगढ़ जिला धार मध्यप्रदेश

मो.9893711820

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