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सागर यादव 'जख्मी ' की लघुकथा - हौसला

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हौसला
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सातवाँ पीरियड चल रहा था | मैं चौथी जमात के बच्चोँ को पढ़ा रहा था | क्लास
के दरवाजे से किसी लड़की की आवाज आयी
'मे आई कम इन सर '

'यस कम इन ' मैने कहा |
आज्ञा पाते ही दसवीँ जमात की छात्रा रजनी मिश्रा अपने हाँथोँ में एक कापी
लिए मेरे पास आयी |

'कहो रजनी , क्या समस्या है ?'

'सर , मैने एक कवि का जीवन परिचय लिखा है |आप मेरी कापी चेककर के बतायेँ
कि मेरी लेखन शैली कैसी है ?'

उसकी कापी देखते ही मेरे पाँव तले मिट्टी खिसक गयी | कापी मेँ किसी और
कवि का जीवन परिचय नहीँ बल्कि मेरा लिखा था | लेखन शैली बहुत ही सहज थी |

'रजनी , ये क्या पागलपन है , तुमने मेरा जीवन परिचय क्योँ लिखा ?'

'क्योँकि , मैं आपको हौसला देना चाहती हूँ '
इतना कहकर वह लड़की कमरे से बाहर चली गयी |मैं उसकी बुद्धि देखकर चकित रह गया |




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सागर यादव 'जख्मी '

नरायनपुर ,बदलापुर,जौनपुर ,उत्तर प्रदेश
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ऊपर का चित्र - डॉ. सुनीता वर्मा , भिलाई की कलाकृति
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