सोमवार, 23 नवंबर 2015

सागर यादव जख्मी की ग़ज़ल, मुक्तक व कविता

सागर यादव जख्मी की ग़ज़ल, मुक्तक व कविता
 सर झुकाकर न जीना (ग़ज़ल)
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वक्त जब बेवफा होगा

हर किसी का बुरा होगा |

आसमाँ को झुकाया है

उसमेँ कुछ हौसला होगा |

इश्क क्यूँकर रुलाता है

दीवानोँ को पता होगा |

सर झुकाकर न जीना तुम

कोई योद्धा कहा होगा |

खाक बिगड़ेगा कुछ उसका

जिसपे हावी खुदा होगा |

चोट खाकर जमाने की

गीत 'सागर' लिखा होगा|
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नादान (मुक्तक)

भला समझा बुरा समझा

मगर तुमको खुदा समझा |

बड़ा नादान था 'सागर'

जफ़ाओँ को वफा समझा ||
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पत्थर दिल दुनिया ( कविता)

मैं अपने दिल की बात

कह देता हूँ

कविताओँ मेँ

मगर,

ये पत्थर दिल दुनिया

जज्बात नहीँ समझती |


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सागर यादव जख्मी( कवि , लेखक और शायर )

नरायनपुर, बदलापुर ,जौनपुर ,उत्तर प्रदेश |

मो. 8756146096

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