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अक्षरा उत्कृष्ट साहित्य सृजन सम्मान-2015’


 ग़ाज़ियाबाद के वरिष्ठ नवगीतकार श्री जगदीश ‘पंकज’  ‘देवराज वर्मा उत्कृष्ट साहित्य सृजन सम्मान-2015’ से सम्मानित 
  मुरादाबाद - साहित्यिक संस्था ‘अक्षरा’ के तत्वावधान में स्टेशन रोड, मुरादाबाद स्थित आर्य समाज के सभागार में कीर्तिशेष श्री देवराज वर्मा की 10वीं पुण्यतिथि पर दिनांकः 06 दिसम्बर, 2015 को सम्मान-समारोह का आयोजन किया  गया जिसमें ग़ाज़ियाबाद के वरिष्ठ नवगीतकार श्री जगदीश ‘पंकज’ को उनकी सद्यः  प्रकाशित नवगीत-कृति ‘सुनो मुझे भी’ के लिए अंगवस्त्र, मानपत्र, प्रतीक चिन्ह, श्रीफल नारियल सहित सम्मान राशि रु0 1100 /= भेंटकर ‘देवराज वर्मा उत्कृष्ट  साहित्य सृजन सम्मान-2015’ से सम्मानित किया गया।

  कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ शारदा के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन एवं  स्व. श्री देवराज वर्मा के चित्र पर पुष्पांजली से हुआ । सर्वप्रथम वरिष्ठ कवि  श्री वीरेन्द्र सिंह ‘ब्रजवासी’ द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई।

  तत्पश्चात संस्था के संयोजक योगेन्द्र वर्मा ‘व्योम’ ने बताया कि-‘‘साहित्यिक  चेतना के धनी स्व. श्री देवराज वर्मा की पुण्यस्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित  किया जाने वाला यह आयोजन देश भर के साहित्य-सृजकों की साहित्य-साधना को  समर्पित है, संस्था अब तक प्रख्यात शायरा डा. मीना नक़वी (मुरादाबाद), वरिष्ठ  गीतकार श्री राम अधीर (भोपाल), डा. ओमप्रकाश सिंह (रायबरेली), डा. बुद्धिनाथ  मिश्र (देहरादून), श्री श्यामनारायण श्रीवास्तव ‘श्याम’ (लखनऊ), श्री  देवेन्द्र ‘सफ़ल’ (कानपुर), युवाकवि श्री राकेश ‘मधुर’ (झज्जर-हरियाणा), वरिष्ठ  शायर श्री ज़मीर ‘दरवेश’ (मुरादाबाद), वरिष्ठ नवगीतकार श्री जयकृष्ण राय ‘तुषार’ (इलाहाबाद) को सम्मानित कर गौरवान्वित है। इस वर्ष नवगीत-कृति ‘सुनो  मुझे भी’ के कवि श्री जगदीश ‘पंकज’ (ग़ाज़ियाबाद) को उनकी उत्कृष्ट रचनाधर्मिता  को सम्मानित करते हुए संस्था गर्व की अनुभूति कर रही है।’’

 इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुविख्यात नवगीतकार डॉ. माहेश्वर  तिवारी ने कहा कि ‘‘जगदीश ‘पंकज’ के नवगीतों में जन-जन की पीड़ा और अवसाद का  बाहुल्य दिखाई देता है, उनकी रचनाओं में कथ्य का नयापन और प्रयोगवादी बिम्ब जब  आपस में जुगलबंदी करते हैं तो पाठक और श्रोता प्रभावित हुए बिना नहीं रह  पाते।’’ मुख्य अतिथि वरिष्ठ गीतकार श्री ब्रजभूषण सिंह गौतम ‘अनुराग’ ने ‘पंकज’जी की रचनाधर्मिता पर केन्द्रित चर्चा करते हुए कहा कि ‘‘जगदीश ‘पंकज’ की पुस्तक ‘सुनो मुझे भी’ के गीत आज की अव्यवस्थाओं के संदर्भ में खुलकर बात  करते हैं और एक प्रतिरोध का स्वर जगाते हैं’’

विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध  साहित्यकार डा. अजय ‘अनुपम’ ने कहा कि ‘‘पंकजजी एक समर्थ गीतकवि हैं, उनके गीत  अपनी मिट्टी से तो जुड़कर बतियाते ही हैं आपसी रिश्तों में बढ़ती छीजन और आमआदमी  की पीड़ा पर सम्यक विमर्श भी करते हैं’’  गीतकार श्री आनंद कुमार ‘गौरव’ के  आलेख का वाचन करते हुए कवि श्री विवेक कुमार ‘निर्मल’ ने कहा कि ‘‘पंकजजी की  रचनाधर्मिता निष्पक्ष है, निःस्वार्थ है एवं निर्विवाद है, उनके गीतों में  अपने समय का युगबोध प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त होता है’’ श्री राजेश  भारद्वाज ने कहा कि ‘‘सम्मान प्रदान किए जाने की परंपरा सदियों से चल रही है, आज जबकि अनेक सरकारी व ग़ैरसरकारी सम्मानों के चयन पर उंगलियाँ उठने लगी हैं, ऐसे में अपनी पारदर्शी चयन-प्रक्रिया के कारण एक छोटे-से शह्र का यह छोटा-सा  सम्मान बहुत बड़ा बन जाता है, पंकजजी को इस बड़े सम्मान के लिए बधाई।’’ कार्यक्रम में सम्मान के पश्चात श्री जगदीश ‘पंकज’ के एकल काव्य-पाठ का भी  आयोजन किया गया जिसमें उन्होंने अपने कई नवगीत प्रस्तुत करते हुए कहा-

‘इस जंगल में बस सूखा ही सूखा है
 कोई पात नहीं है, कोई घास नहीं
 आसमान को देख रहे हैं सदियों से
 पानी मांग रहे झीलों से नदियों से
 धुएं की बदली आती है जाती है
 कभी बरसने की जिससे कुछ आस नहीं’
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‘आजकल हैं नागफनियों-से
 कँटीले दिन
 खून से लिथड़े सबेरे
 रक्तरंजित शाम
 मिल रहे भयभीत-शंकित
 रोज़ आठों याम
 आदमी का भाग्य लिखतीं
 गोलियां गिन-गिन’
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  ‘एक क्षण पूरी सदी है
  क्या भयानक त्रासदी है
 सोचना कितना कठिन है
 खुरदुरा-सा एक दिन है
 हर सुबह जलती नदी है’
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‘हमने अंगारे चूमे हैं
 आग उठाई है पोरों से
 नहीं किसी भी चिंगारी के
 आगे झुककर किया समर्पण



          -योगेन्द्र वर्मा ‘व्योम’
              संयोजक
               साहित्यिक संस्था - ‘अक्षरा’

   पोस्ट बाक्स - 139,
          मुरादाबाद - 244001(उ.प्र.
               मोबाइल- 094128 05981

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