आलेख || कविता ||  कहानी ||  हास्य-व्यंग्य ||  लघुकथा || संस्मरण ||   बाल कथा || उपन्यास || 10,000+ उत्कृष्ट रचनाएँ. 1,000+ लेखक. प्रकाशनार्थ रचनाओं का  rachanakar@gmail.com पर स्वागत है

सागर यादव 'जख्मी' ताज़ा प्रेम कविताएँ

image
1. तोहफा
-----------

पतझड़ के मौसम मेँ

उसने मुझे

अपनी यादोँ का फूल भेजा है

जिसमेँ तन्हाई की खुशबू है

और दर्द की नज़ाकत

जिसको बसा लिया है

मैने अपनी आँखोँ मेँ

और रख दिया है

दिल के गुलदान मेँ सँभालकर |

2. अतीत
-------------

अब क्योँ उस दिन का जिक्र करूँ

जब दिल मेरा टूटा था

सारे अरमान बिखरे थे

हँसना भी भूल गए

हर पल सिर्फ

आँसू थे आँखोँ मेँ मेरे |

3. तन्हा
-----------

मैं तन्हा हूँ

निश-दिन पीता हूँ

तन्हाई का ज़हर

जिसने यह गम

बख्शा है मुझे

मैने उसका नाम लिखा है

अपने दिल की दरो-दीवार पर|

4.उमर भर का गम
----------------

बहुत ही नादान थे हम

साहिल के करीब रेत से

प्यार का महल जो बनाए

वक्त क्या बदला

मेरी दुनिया ही बदल गयी

एक बेदर्द मौज आयी

और सब कुछ बहा ले गयी |

5.एहसास
-----------------

ऐ खुदा!

जल्द मौत बख्श मुझे

अब और दर्द सहा नहीँ जाता

इस स्वार्थी दुनिया मेँ

जहाँ मै तड़पता हूँ

मेरी जिन्दगी तड़पती है

सिर्फ.....

पल भर की खुशी के लिए

कोई सुनता नहीँ अपील

हर इंसा मुर्दा हो गया है

और एहसास .....

उससे जुदा हो गया |






---------------


1. एक लड़की है
--------------

एक लड़की है

कि जिसे मैं

बहुत प्यार करता हूँ

वह मुझे अपनी जाँ

से भी प्यारी है

दोस्तोँ , यकीन मानो !

मेरी आँखोँ मेँ उसकी

चाहत का दरिया छिपा है

और जब कभी लहरेँ

उसकी यादोँ से टकराती हैँ

'जख्मी' मेरा दिल

बहुत रोता है |

2.तन्हाई का अँधेरा
-------------
--बुझ गया प्यार का दीपक

छिन गया चैन दिल का

और दर्द ने मुझको

अपने साँचे मेँ ढाल दिया ,

कोई हो तो राह दिखाए

इस तन्हाई के अँधेरे मेँ |

3. वफ़ा
---------

आँखेँ उसकी भी आयी

रुलाकर मुझको

वो भी ना सो पायी

जगाकर मुझको

जरा उसकी वफ़ा तो देखो

वो खुद भी मिट गयी

मिटाकर मुझको |

4. मैं पागल हूँ
--------------

वो सच ही तो कहती है

कि मैं पागल हूँ

क्योँकि.......

मुझे कोई मतलब ही नहीँ दुनियादारी से

मैं तो डूबा रहता हूँ सिर्फ,

अपनी कविता के प्यार मेँ

से सुनता हूँ उसकी छटपटाहट को

और उसे उकेरता हूँ

कागज़ के कोरे पन्नोँ पर |

5.जिन्दगी
------------

तड़पता है दिल

थमते नहीँ हैँ आँखोँ के अश्क

अभिलाषाएँ एक बार जगकर

फिर दफ्न हो गईँ

बेरहम जमाने तले

हम हर घड़ी रोते हैँ

गम-ए -जहर पीते हैँ

सिर्फ-----

पल दो पल की जिन्दगी जीने के लिए |



-------------

सागर यादव 'जख्मी'

नरायनपुर,बदलापुर,जौनपुर,उत्तर प्रदेश,भारत |

मो.8756146096

टिप्पणियाँ

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.