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सागर यादव 'जख्मी' ताज़ा प्रेम कविताएँ

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1. तोहफा
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पतझड़ के मौसम मेँ

उसने मुझे

अपनी यादोँ का फूल भेजा है

जिसमेँ तन्हाई की खुशबू है

और दर्द की नज़ाकत

जिसको बसा लिया है

मैने अपनी आँखोँ मेँ

और रख दिया है

दिल के गुलदान मेँ सँभालकर |

2. अतीत
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अब क्योँ उस दिन का जिक्र करूँ

जब दिल मेरा टूटा था

सारे अरमान बिखरे थे

हँसना भी भूल गए

हर पल सिर्फ

आँसू थे आँखोँ मेँ मेरे |

3. तन्हा
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मैं तन्हा हूँ

निश-दिन पीता हूँ

तन्हाई का ज़हर

जिसने यह गम

बख्शा है मुझे

मैने उसका नाम लिखा है

अपने दिल की दरो-दीवार पर|

4.उमर भर का गम
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बहुत ही नादान थे हम

साहिल के करीब रेत से

प्यार का महल जो बनाए

वक्त क्या बदला

मेरी दुनिया ही बदल गयी

एक बेदर्द मौज आयी

और सब कुछ बहा ले गयी |

5.एहसास
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ऐ खुदा!

जल्द मौत बख्श मुझे

अब और दर्द सहा नहीँ जाता

इस स्वार्थी दुनिया मेँ

जहाँ मै तड़पता हूँ

मेरी जिन्दगी तड़पती है

सिर्फ.....

पल भर की खुशी के लिए

कोई सुनता नहीँ अपील

हर इंसा मुर्दा हो गया है

और एहसास .....

उससे जुदा हो गया |






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1. एक लड़की है
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एक लड़की है

कि जिसे मैं

बहुत प्यार करता हूँ

वह मुझे अपनी जाँ

से भी प्यारी है

दोस्तोँ , यकीन मानो !

मेरी आँखोँ मेँ उसकी

चाहत का दरिया छिपा है

और जब कभी लहरेँ

उसकी यादोँ से टकराती हैँ

'जख्मी' मेरा दिल

बहुत रोता है |

2.तन्हाई का अँधेरा
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--बुझ गया प्यार का दीपक

छिन गया चैन दिल का

और दर्द ने मुझको

अपने साँचे मेँ ढाल दिया ,

कोई हो तो राह दिखाए

इस तन्हाई के अँधेरे मेँ |

3. वफ़ा
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आँखेँ उसकी भी आयी

रुलाकर मुझको

वो भी ना सो पायी

जगाकर मुझको

जरा उसकी वफ़ा तो देखो

वो खुद भी मिट गयी

मिटाकर मुझको |

4. मैं पागल हूँ
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वो सच ही तो कहती है

कि मैं पागल हूँ

क्योँकि.......

मुझे कोई मतलब ही नहीँ दुनियादारी से

मैं तो डूबा रहता हूँ सिर्फ,

अपनी कविता के प्यार मेँ

से सुनता हूँ उसकी छटपटाहट को

और उसे उकेरता हूँ

कागज़ के कोरे पन्नोँ पर |

5.जिन्दगी
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तड़पता है दिल

थमते नहीँ हैँ आँखोँ के अश्क

अभिलाषाएँ एक बार जगकर

फिर दफ्न हो गईँ

बेरहम जमाने तले

हम हर घड़ी रोते हैँ

गम-ए -जहर पीते हैँ

सिर्फ-----

पल दो पल की जिन्दगी जीने के लिए |



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सागर यादव 'जख्मी'

नरायनपुर,बदलापुर,जौनपुर,उत्तर प्रदेश,भारत |

मो.8756146096

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