विश्वम्भर व्यग्र की ग़ज़ल - साथ में हमराह हो तो...

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

image

ग़ज़ल
          *******
    साथ में हमराह हो तो,
    लक्ष्य की परवाह ना

    कॉटों भरी राह में भी,
    मुख से निकले आह ना

    मिलता रहे संग उसका,
    ओर किसी की चाह ना

    व्यस्त रहें तो स्वस्थ रहें,
    व्यापे समय की दाह ना

    सकारात्मक सोच रखिए,
    फिर करें कोई गुनाह ना

    बहता रहा समय दरिया ,
    रुका कभी प्रवाह ना

    कट गया यूँ हीं सफर,
    'व्यग्र' मन की थाह ना...
                 ***********

         -  विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'
                   गंगापुर सिटी,स.मा. (राज.)
                   322201

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "विश्वम्भर व्यग्र की ग़ज़ल - साथ में हमराह हो तो..."

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.