सोमवार, 7 दिसंबर 2015

विश्वम्भर व्यग्र की ग़ज़ल - साथ में हमराह हो तो...

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ग़ज़ल
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    साथ में हमराह हो तो,
    लक्ष्य की परवाह ना

    कॉटों भरी राह में भी,
    मुख से निकले आह ना

    मिलता रहे संग उसका,
    ओर किसी की चाह ना

    व्यस्त रहें तो स्वस्थ रहें,
    व्यापे समय की दाह ना

    सकारात्मक सोच रखिए,
    फिर करें कोई गुनाह ना

    बहता रहा समय दरिया ,
    रुका कभी प्रवाह ना

    कट गया यूँ हीं सफर,
    'व्यग्र' मन की थाह ना...
                 ***********

         -  विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'
                   गंगापुर सिटी,स.मा. (राज.)
                   322201

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