के.एल.साहू ’’सुदर्शन’’ की कुंडलियाँ

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कुण्डलियाँ

1.भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचारी के जनक बैठे लगा बजार,
दया, धर्म इनको नहीं भूले सदव्यवहार।
भूले सदव्यवहार मानवता उनने छोड़ी,
ग्राम, देश, परिवार की नैतिकता भी तोड़ी।
कहें सुदर्शन चहूँ ओर मची है मारा-मारी,
नीचे से ऊपर तक छाई जहँ तहँ भ्रष्टाचारी।

2.शिक्षा

शिक्षा के इस दौर में शिक्षित बेरोजगार,
पढ़,लिखकर फुरसत हुए दिए गर्त में डार।
दिये गर्त में डार कुछ करते नहीं कमाई,
भटकत है जगमाहिं दुष्टन की संगत पाई।
कहें सुदर्शन छुट-पुट मांगन लागे भिक्षा,
कुछ बर्बाद कुछ अपराधी ऐसी देश की शिक्षा।

3.कथनी.करनी

कथनी करनी एक सी जब तक होगी नाय,
तब तक मानव जाति में उपजे बुरी बलाय।
उपजे बुरी बलाय इसी के सभी पुजारी,
हित अनहित का ज्ञान तऊन दशा सुधारी।
कहें सुदर्शन यार पायके पावन धरती,
कीजै सघन विचार सुधारौ कथनी करनी।

4.महंगाई

महंगाई के राज में सुखी नहीं है कोय,
जैसे बाढै़ आमदनी सब कुछ मंहगा होय।
सब कुछ मंहगा होय कठिन है रोजी रोटी,
दालें भंई बेचाल प्याज चढ़ी है चोटी।
हुए सुदर्शन तंग जब घर गूँजी सहनाई,
दिन प्रतिदिन अब खाय जात है जा डायन महंगाई।

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परिचय.
कवि नाम - के.एल.साहू’’सुदर्शन’’
पूरा नाम.कन्हैयालाल साहू
पिता.श्री मनू साहू
जन्मतिथि.30.12.1969
शिक्षा.एम.ए.(हिन्दी)
व्यवसाय.शासकीय शिक्षक
पता.वार्ड नं..01
बड़ामलहरा ,जिला - छतरपुर म.प्र.
पिन.471311 मो..9617694695

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