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कामिनी कामायनी का यात्रा वृत्तांत - सेयाम रेयप कंबोडिया का पानी पर तैरता हुआ गांव

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पानी पर तैरता हुआ गाँव ।

   आज के इस अत्याधुनिक युग में भी संसार में अनेक चीज और कहानियां अचंभित करने वाली है ,ऐसी ही एक कहानी ,जो कहानी नहीं ,बल्कि सच्ची दास्तान है ,एक जीवित  हकीकत है ,सेयाम रेयप [कंबोडिया ] का फ्लोटिंग विलेज  यानि  पानी पर तैरता हुआ गाँव । अँकोर वट के विश्व प्रसिद्ध और विशाल मंदिर परिसर देखने के बाद पर्यटकों का सबसे पसंदीदा स्थान है यह । सेयाम रेयप के अपने होटल से हमें यहाँ तक पहुँचने में करीब दो घंटा का समय लगा ग्रामीण इलाके से ,खेत खरिहानों के बीच से रास्ते बनाए जा रहे हैं ।  सड़क इतनी अच्छी नहीं है ,बारिश के मौसम में सारा इलाका पानी से डूब जाता है । वैसे वहाँ नवीन सड़कें  कुछ ऊंची बनने की शुरुआत होने लगी है,ताकि बारिस के मौसम में सड़कें जलमग्न न हो ।  ।{वहाँ की स्थानीय लोकप्रिय सवारी टुकटुक से आने में वक्त कुछ ज्यादा लगता है ,मगर रास्ते में हर चीज को इत्मीनान से देखने का वक्त भी मिलता है और उसका एक अनोखा आनंद भी इस लिए अधिकांश पर्यटक इसे पसंद करते हैं । }सँकरे रास्ते में छोटे छोटे झोपड़ीनुमा दुकानें भी मिलती हैं जो अपने हिंदुस्तान के पानी में डूबे जगहों पर बने मचान वाले कठ घरे की याद दिलाते हैं  यहाँ पर्यटकों की सुविधा के सामान बिसलरी बोतल ,कोल्ड ड्रिंक्स ,बिस्किट आदि मिलते हैं ।विशाल खेती योग्य  भूमि है ,कुछ महिलापुरुष बड़े बड़े टॉप सिर पर लगाए ,खेतों में धान रोप रहे थे ,वहाँ बड़ी तीखी धूप होती है ,इसलिए बड़े टोपों का प्रयोग करना मजबूरी सा है । उजाड़ सुनसान सा रास्ता तय कर हम नदी के करीब का हलचल ,आवाजें  सुनकर खुश हुए ,टूक टूक चालक का गाँव भी उधर ही था ,मगर उसके आग्रह को हमें ठुकराना पड़ा क्योंकि वक्त शोर मचा रहा था ।

     नदी के एक तट के बाद वहाँ तक जाने के लिए  फेरी ,नाव या जहाज से नदी के बीचोंबीच तकरीबन आधा घंटा चलना पड़ता है ,यहाँ नाव   जहाज काफी संख्या में हैं ,और नाविक के साथ उसके परिवार की महिलाएं ,एवं अन्य सदस्य  भी मदद गार रहते हैं उनका पेशा यही है ।नाव नदी के बीचोंबीच चलती है,कहीं कहीं पानी में उभरी हुई जमीन भी दिखाई देती है ,जहां ये लोग शायद कुछ अनाज भी उपजाते होंगे । झड़ी नुमा वृक्ष भी बहुत भले भले से दिखते हैं , । काफी नावों ,की आवाजाही थी नदी में । मिट्टी का रंग लाल सा है ,पानी भी गंदलायी हुई सी । यहाँ का पानी पीना पर्यटकों के लिए सख्त माना है

   अपने किस्म का यह अनोखा विलेज देखकर आश्चर्य हुआ ।कभी कभार पिकनिक मनाने के लिए तो ठीक है ,मगर जिंदगी  के हर एक लमहे वैसे में गुजरना, वास्तव में सोचकर ही भयावह लगा था{बाढ़ का लोमहर्षक दृश्य जैसा ,मगर यहाँ कुछ बिना वजह पानी में बह नहीं रहा था ,जिंदगी और सामान सब कुछ मनुष्यों के नियंत्रण में } ।चारों ओर पानी,पानी के ऊपर लकड़ी ,बांस के बने घर ।इधर उधर आने जाने के लिए हर घर के पास एक लंबी सी नाव ।रस्सी से बंधी दिख रही थी । दो घरों के बीच पानी पर ही बांसों को एक दूसरे से बांध कर चौड़ा जगह बना लिया गया था ,जिसके ऊपर नायलोन की मच्छरदानी सी बंधी थी ,उसके भीतर आठ दस बत्तक मजे में घूम रहे थे । एक कुत्ता भी टायर में फंसा तैर रहा था । नाविक ने जिस  घर के आगे अपनी जहाज खड़ा किया था ,वह एक दुकान थी ,वहाँ बाहरी दुनिया के पर्यटकों की आवश्यकता की समानें मौजूद थी ।जहाज वाले ने दुकान के पूरब तरफ के दरवाजे खोलकर ,उस दुकान और बगल के एक घर के बीच दो मंज़िले बड़े जहाज के नीचे वाले भाग में सोए हुए मगरमच्छों और उनके बच्चों को दिखाया । अनेक छोटे बड़े मगरमच्छ आंखे बंद किए निश्चल पड़े हुए थे ।ऊपर से जाल से घिरा हुआ था । दोनों छोटे छोटे पामेरियान कुत्ते जो हमारे पीछे पीछे उस दुकान से वहाँ चले आए थे ,वे दोनों आपस में ही आपस में  नूरा कुश्ती  करते रहे थे ,एक बार भी भौंका नहीं । कुछ घरों में बैठे हुए लोग अपना दैनिक काम निबटा रहे थे ,एक महिला अपने सात  आठ महीने के बच्चे  को खेला रही थी ,कोई जाल बुन रही थी ॥ नाईलोन के जाल का बना हुआ चादर को दो बाँसों के बीच बांन्ध कर उसपर एक महिला सोई हुई थी । दो महिलाएं, रास्ते में, अपनी अपनी नाव लिए पानी में डूबे वृक्षों से कुछ तोड़ती हुई मिली थी ।छोटे छोटे बच्चे नाव चलाते हुए दिखे । एक नाविक नाव पर कहीं से पेट्रोल के बोतल लाते हुए दिखे {वहाँ  सूखी भूमि पर भी जगह जगह दो दो लिटर के बोतल में पेट्रोल बिकते दिखे थे } सामान्य जन जीवन ,फुरसत में लोग ।

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   कोमपोंग लुओंग में  पाँच ऐसे गाँव हैं ,जो पुरसत प्रांत में है । यहाँ अधिकांश मल्लाह लोग रहते हैं ।वैसे विभिन्न समुदाय के लोग यहाँ रहते हैं ,जिनमें चोम,कुछ चीनी  परिवार ,खमेर और वियतनामी हैं । तकरीबन 70%लोग अपनी आजीविका मत्स्य उद्योग के सहारे पूरा करते हैं ,बाकी 30% इसी धंधे से जुड़े अन्य व्यवसायों  पर जैसे ,जाल बनाना ,नाव बनाना ,बेचना ,खरीदना आदि पर निर्भर हैं ।पर्यटकों के आगमन से इनकी आर्थिक स्थिति सुधारने लगी है । ये लोग यहाँ खुश है और यहाँ से बाहर नहीं जाना चाहते । बाहर की धरती या नदी का किनारा जहां धरती दिखाई देती है ,इन्हें हिलती हुई लगती है ।

   कहा जाता है कि प्राचीन काल से ही ये  गाँव अस्तित्व में है ,किसी समय यह किसी राजा का संकट में  छुपने का गोपनीय स्थल भी रहा है ।

   यहाँ एक आधुनिक समाज की अधिकांश चीजें उपलब्ध हैं । एक स्कूल है ,अस्पताल है ,चर्च है ,हेयर कटिंग सैलून है ।

हवा के रुख और नदी के प्रवाह के अनुसार  ये गाँव अपना भ्रमण करते रहते हैं ।  रात मे यहाँ पानी में  जलती हुई लाईट की  परछाईं काफी अच्छी  लगती है । कुछ पर्यटक यहाँ रातें गुजरना भी पसंद करते हैं । यकीनन ये गाँव खुद से जुदा और जग से पराए होने का एहसास दिलाते हैं ।

    

कामिनी कामायनी ॥

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