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प्रतिलिपि सम्‍मान समारोह तथा "पढ़ने के नये माध्यम और साहित्यकार की भूमिका" विषय पर गोष्ठी का आयोजन

 

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लखनऊ के जयशंकर प्रसाद सभागार में २८ नवम्बर २०१५ को प्रतिलिपि डॉट कॉम की ओर से आयोजित प्रतिलिपि कथा-सम्मान और प्रतिलिपि कविता सम्मान में साहित्यकारों को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर " पढ़ने के नये माध्यम और साहित्यकार की भूमिका" विषय पर गोष्ठी का आयोजन भी प्रतिलिपि की ओर से किया गया. गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार शिवमूर्ति ने की. वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे. वक्ताओं में कथाकार अखिलेश, वरिष्ठ आलोचक वीरेन्द्र यादव, कवि सर्वेन्द्र विक्रम और अनिल त्रिपाठी ने अपनी बात रखी. कथाकार शिवमूर्ति ने पहले स्थान पर रही प्रज्ञा की कहानी 'तकसीम' को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया. ये कहानी इस वर्ष 'पाखी' पत्रिका में प्रकाशित हुई थी. अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में शिवमूर्ति जी ने इन्टरनेट पर साहित्य की दुनिया का स्वागत करते हुए कहा कि यदि साम्प्रदायिकता पर चिंता व्यक्त करती कहानी पुरस्कृत हो रही है तो पाठक गंभीर हैं और सामाजिक सरोकार की कहानियां समाज पसंद करता है. इस मौके पर नरेश सक्सेना जी ने कविताओं में प्रथम आई सेमंत हरीश की कविता के साथ चुनी गयी पहली बीस कविताओं में निर्णायक मंडल द्वारा चुनी कविताओं में अनिल अनहलातु की कविता ' मानवीय पीढ़ा का जिगुरत' को सम्मानित किया . चयन समिति में वरिष्ठ कवि विजेंद्र, माया मृग और मंतव्य पत्रिका के सम्पादक हरेप्रकाश उपाध्याय रहे. इस अवसर पर मधु अरोड़ा की कहानी और आभा खरे की कविता भी सम्मानित हुईं. सम्मानित रचनाकारों में प्रज्ञा ने वर्तमान समय की चुनौतियों पर अपनी बात रखते हुए अपनी कहानी की रचना- प्रक्रिया पर प्रकाश डाला और अनिल अनहलातु ने अपनी कविता का पाठ किया .

परिचर्चा के दौरान वरिष्ठ आलोचक वीरेन्द्र यादव ने भारतीय भाषा के साहित्य को एक नए मंच देने के लिए प्रतिलिपि का स्वागत किया. उन्होंने नई तकनीक की अनिवार्यता , उच्च सोच और और वैज्ञानिक तेवर की जरूरत पर बल दिया. वरिष्ठ कथाकार और ' तद्भव ' के सम्पादक अखिलेश ने इस नये माध्यम की फंडिंग और फिल्टरेशन की बात की. रचनाओं की स्तरीयता के लिए रिव्यूर्स मंडल की जरूरत पर बल दिया. नरेश सक्सेना जी ने साहित्य के नये तकनीकी माध्यमों से डरने की बजाय इन्हें समय की जरूरत बताते हुए इसकी सबलताओं पर तथ्यों सहित रौशनी डाली. कवि अनिल त्रिपाठी ने विषय प्रवर्तन किया और सर्वेन्द्र विक्रम ने भी अपनी बात रखी. कार्यक्रम का सफल संचालन कथाकार रजनी गुप्त ने किया.

इस मौके पर प्रतिलिपि की ओर से एक स्लाइड शो दिखाते हुए इसके संस्थापकों में प्रमुख सुश्री सहृदयी मोदी ने आगामी योजनाओं और अपने काम की विस्तृत जानकारी दी. कार्यक्रम का आयोजन करने वाली प्रतिलिपि की हिंदी अधिकारी वीणा वत्सल ने कार्यक्रम में आये रचनाकारों और पुरस्कार विजेताओं का स्वागत किया. इस सम्मान समारोह में लखनऊ शहर के अनेक पाठक-रचनाकार शामिल हुए. इस मौके पर रामेश्वर पाण्डेय , कौशल किशोर, नसीम साकेती, शकील सिद्दकी , उषा राय,अनीता श्रीवास्तव,प्रज्ञा पाण्डेय, रविकांत आदि मौजूद थे.

प्रस्तुति : डॉ राकेश कुमार

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