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दीपक आचार्य का आलेख - जो झूठा, वो खोटा

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हर इंसान की अपनी अलग प्रवृत्ति, स्वभाव और मनोदशा होती है। कुछ लोग दैवत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं, कुछ लोग आसुरी भावों का। इन्हीं के अनुरूप इनका जीवन चलता है और पहचान बनती है। इसी हिसाब से दुनिया भर में हर मामले में दो प्रकार के लोगों का अस्तित्व हमेशा रहता है।

इंसान के मामले में अब सब कुछ गड़बड़ा गया है। पहले इंसान का हृदय और चेहरा एक ही बात कहता था। जब से इंसान मुखौटा संस्कृति में जीने लगा है तभी से उसके बारे में यह जानना, समझना और पहचान पाना बड़ा ही मुश्किल हो गया है कि कोई इंसान आखिर कैसा है।

इस मामले में हम सभी आजकल गच्चा खाने लगे हैं। होता यह है कि कई बार हम जिस किसी इंसान को चिकनी-चुपड़ी लच्छेदार भाषा और मोहक भावमुद्रा में देखकर अच्छा समझने लगते हैं वह  नालायक सिद्ध हो जाता है। और कई बार जिन्हें हम बुरा समझते हैं वे हमारे बड़े काम आते हैं।

हालात सब तरफ ऎसे होते जा रहे हैं कि कहीं भी कोई इंसान को पहचान नहीं पाता। दूसरे सारे प्राणियों के बारे में सब कुछ साफ-साफ बताया जा सकता है किन्तु  इंसान ही ऎसा एकमात्र जीव है जिसके बारे में कोई भी स्पष्ट और सटीक टिप्पणी नहीं कर सकता।

यह स्थिति न केवल हमारे अपने क्षेत्र की है बल्कि दुनिया का कोई सा कोना ऎसा नहीं है जहां इंसानी स्वभाव और व्यवहार में कोई बदलाव न आया हो। हाल के कुछ दशक तो इंसानियत के क्षरण वर्ष के रूप में ही मशहूर रहे  हैं जहाँ इंसानी जिस्म विस्फोटक संख्या में धरती पर अवतार ले रहे हैं मगर इंसानियत गायब होती जा रही है। 

यह स्थानीय, देशज और वैश्विक संकट है। आमतौर पर मानवों को दो जात में देखा जाता रहा है - स्त्री और पुरुष। लेकिन अब यदि इंसानियत के ह्रास के मौजूदा माहौल को सामने रखकर मनुष्यों का आकलन करना हो तो पूरी दुनिया में दो ही तरह के इंसान देखे जाने लगे हैं। एक वे हैं जो हर हमेशा सत्य बोलते हैं और सच पर अडिग रहते हैं चाहे जैसी परिस्थितियां सामने हों। दूसरा प्रकार उन लोगों का है जिनके लिए सच और झूठ कोई मायने नहीं रखते। इन लोगों के लिए झूठ बोलना रोजमर्रा का काम है।

किसी भी इंसान को परखना हो तो  अब सच और झूठ ही एकमात्र पैमाना रह गया है। जो सच बोलता है और सच्चे कर्म करता है वह इंसानियत से भी भरपूर होगा तथा उसके भीतर मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं, सदाचार तथा उदारता आदि मानवोचित गुणों का भी समावेश होगा।

ऎसा इंसान अपने चेहरे और कर्म दोनों से श्रेष्ठ और दिव्यताओं से भरा होता है। इनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होता। और इसही मनःसौन्दर्य की वजह से वह स्वाभाविक आकर्षण का केन्द्र भी होता है। इस प्रकार के इंसान वास्तव में धरती के रत्न हैं।

लेकिन आजकल बहुत से लोग झूठे हैं और झूठा व्यवहार करते हैं। जो इंसान अपने जीवन में झूठ को अपना लेता है वह जिन्दगी भर झूठ से पिण्ड नहीं छुड़ा सकता। एक बार झूठ का आश्रय पा लेने का मतलब है सदा-सदा के लिए कलिमल को सहर्ष स्वीकार कर सहचर बना लेना।

जो इंसान झूठ बोलता है चाहे वह झूठ छोटा या बड़ा हो अथवा मजाक या मनोरंजन में ही क्यों न बोला गया हो, एक झूठ एक दिन की आयु कम करता है। हमारी आयु में कमी होने का एक कारण यह भी है। लेकिन लोग इस बात को समझने को तैयार नहीं हैं।

झूठ कभी भी अकेला नहीं होता। यह अपने साथ वासना, घृणा, कृपणता, दुष्टता, आसुरी भाव, संवेदनहीनता, लूट-खसोट और तस्करी, विश्वासघात, आडम्बर, पाखण्ड, स्वार्थ, व्यभिचार, स्वेच्छाचार, मर्यादाभंग, अनुशासनहीनता और अहंकार से लेकर उन सभी बुराइयों को लेकर आता है जो एक नालायक और दुष्ट इंसान के लक्षणों में शुमार होता है।

झूठ बोलने वाले लोग न अपने स्वयं के होते हैं, न माता-पिता, पत्नी-पति, बहन-भाई या किसी कुटुम्बी के। ये लोग अपना स्वार्थ सामने आने पर किसी के साथ भी दगा कर सकते हैं, जमीन-जायदाद हड़प सकते हैं, किसी का भी नीचा दिखा सकते हैं, कोई सा विध्वंस रच सकते हैं। बड़ा दाँव लगे तो आसामाजिक तत्वों, आतंकवादियों और देशद्रोहियों से हाथ मिला सकते हैं, देश बेच सकते हैं और सब कुछ दाँव पर लगा सकते हैं।

झूठ अपने आप में वह बहुत बड़ी ताकत है जिसके सहारे नकारात्मक शक्तियां, अंधेरे और अंधेरों में रहने तथा फैलाने वाले निशाचर पनपते हैं और दुनिया का उजियारा छीनने के लिए प्रयत्नशील रहा करते हैं। बहुत सारे लोग अपनी रोजमर्रा की जिन्दगी में जाने कितनी बार झूठ बोलते हैं।

झूठ बोलने वाले लोग औरों की झूठन पर जिन्दा रहते हैं और इनके लिए अपना पूरा जीवन झूठ की बुनियाद पर आडम्बरों के महल खड़े करते हुए खुद को प्रतिष्ठित रखने में लग जाता है। इनका हर काम झूठ पर निर्भर रहा करता है और इस कारण झूठ इनकी जिन्दगी का सबसे निकट रहने वाला, दिन-रात का साथी बना रहता है।

इसलिए संसार में किसी इंसान की परख करना चाहें तो उसकी एकमात्र कसौटी यही है कि वह इंसान झूठ बोलता है या सही। जो झूठ बोलता है उस पर कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि ऎसा इंसान कभी भी किसी को भी धोखा दे सकता है।

दुनिया का हर धोखेबाज, विश्वासघाती और धूर्त इंसान झूठा होता है। इसलिए झूठ बोलना, झूठे लोगों के साथ किसी भी प्रकार का व्यवहार करना, उनके घर या उनके साथ किसी भी प्रकार का व्यवहार व खान-पान तथा संभाषण सब कुछ हमारे पुण्यों का क्षय करने वाला है।

हम कितने ही पुण्यशाली, भाग्यवान और सज्जन हों, झूठे लोगों का साथ हो जाने पर हमारी आयु, प्रतिष्ठा और पुण्य सभी की हानि होती है और एक न एक दिन हमें कलंकित होकर अभिशप्त जीवन जीने को विवश होना ही पड़ता है। इसलिए सच्चाई का दामन थामें और झूठों का साथ छोड़ें, चाहे ये झूठे लोग कितने ही बड़े, अभिजात्य और महान क्यों न हों।

झूठ का आश्रय और झूठों का साथ पाने का सीधा सा अर्थ है हमारे दुर्भाग्य का उदय। भले ही झूठे लोगों का साथ पाते हुए हमें सफलताएं पाने का मुग्धकारी अनुभव हो। यह हमारे पतन का द्वार खुल जाने का संकेत ही है। झूठ और सच के आधार पर अपने आस-पास के लोगों को पहचानें, इससे बढ़िया और पारदर्शी और कोई संकेतक नहीं है। हमेशा याद रखें - जो झूठा वो महा खोटा।

 

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दीपक आचार्य के प्रेरक आलेख inspirational article by deepak aacharya

- डॉ0 दीपक आचार्य

  dr.deepakaacharya@gmail.com

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