शनिवार, 5 दिसंबर 2015

शिव कुमार यादव के प्रेम गीत

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तुम्हें देखकर

एक मुस्कान ठहरी है तेरे होठों में

जरुर किसी ने सपनों को गुदगुदाया होगा

नहीं है चेहरे में कोई काला बादल

वफ़ा के गीत फिर कोई

तेरे कानों में गुनगुनाया होगा

माना की तल्ख़ है जिंदगी का सफ़र

जीने के लिए हौसला चाहिए

मंजिल दूर नहीं होती सपनों की

जंग लड़ने का फैसला चाहिए

तुम बहुत मासूम हो,पाक इरादे हैं

जिंदगी की वादियों में तैरते वादे हैं

लगता है पढ़ लिया जिंदगी की किताब

किसी लफ्ज ने तुम्हें भरमाया होगा

देख रहा हूँ शोखियाँ तेरी आँखों में

खिल रहे फूल जैसे चाहत की शाखों में

संजीदा चेहरे पे नूर आ गया है

जैसे जिंदगी में जीने का सुरूर आ गया है

वक्त ने फिर सपनों को सहलाया होगा

Xxxxxxxxxxxxxxxxxxx

 

वक्त

खाली हो गया आंसुओं से

मेरी आँखों का पैमाना.

नहीं रहा अब मेरी गलियों में

तेरा आना जाना.

कौन बेरहम है, कह नहीं सकता

वक्त या वक्त का फ़साना.

लुट गया जज्बातों का मेला

नहीं रहा अब कोई बहाना,

बदलते मौसम से बदल गए

तेरी आरजू, तेरा ख़याल.

नहीं रहा अब, मेरे नाम से

तेरे गालों में वो गुलाल,

दफ़न हो गया सपनों का

सजना – सजाना..

xxxxxxxxxxxxxxxxxx

 

तेरी गली

अनजिये सपनों की

पहचान है, तेरी गली

आंसू नहीं, गम नहीं

मुस्कान है, तेरी गली

जज्बात के सितारों से सजी

आसमान है, तेरी गली

खोकर हम दोनों को

परेशान है, तेरी गली

आज भी बुलाती है

नादान है, तेरी गली

अहसास की तपिश लिये

अरमां है , तेरी गली

आज मैं नहीं,तुम नहीं

सुनसान है , तेरी गली

दफ़न है रिश्तों का वजूद

कब्रिस्तान है , तेरी गली

Xxxxxxxxxxxx

शिव कुमार यादव

डी. 170 – आर.एम.एस.कालोनी

टैगोर नगर / रायपुर / छत्तीसगढ़

मोबाईल- 09407625051

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