रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

रवीश कुमार का व्यंग्य - नए वर्ष की दुर्भावनाएँ

ये शुभकामना नहीं दुर्भावना है ठाकुर

image

(आमतौर पर इंटरनेट की सामग्री को रचनाकार में रीसायकल नहीं किया जाता. यदा कदा अपवाद स्वरूप कुछ सामग्री अलबत्ता साझा जरूर की जाती है. प्रस्तुत आलेख सर्वत्र साझा करने योग्य है - बारंबार. आनंद लें, और तनिक विचारें!)

सालागमन की पूर्व बेला पर नया लिखने के लिए कुछ नहीं है । सारी बातें कही और लिखी जा चुकी हैं । लोग इस कदर बोर हो चुके हैं कि शुभकामनाओं की रिसाइक्लिंग करने लगे हैं । शुभकामनाओं का भी अर्थशास्त्र के सीमान्त उपयोगिता ह्रास नियम के तहत मूल्याँकन होना चाहिए । एक ही शुभकामना अगर कई लोगों से होते हुए आप तक पहुँचे तो उसका क्या असर होगा । कई साल से इस्तमाल में हो तब क्या कोई असर बाकी रह सकता है । गन्ने की तरह हमने शुभकामनाओं से रसों को आख़िरी बूँद तक निचोड़ लिया है ।

मैं समझ सकता हूँ कि सबके लिए अलग से शुभकामना लिखने का न तो वक्त है न हुनर । जिनको अंग्रेज़ी नहीं आती उनका अंग्रेज़ी में न्यू ईयर विश देखकर टेंशन में आ जाता हूँ कि ये कब सीख लिया इसने । हर शुभकामना में समृद्धि
होती है । क्यों होती है और इससे क्या हम समृद्ध होते हैं ? कुछ लोग हैप्पी न्यू ईयर का वर्ण विस्तार करेंगे । एच से कुछ बतायेंगे तो वाई से कुछ । हम तो स्कूल में यही पढ़ कर निकले कि वाई से सिर्फ याक होता है । किसी ने नहीं बताया कि ईयर भी होता है ।

मैं शुभकामनाओं के आतंक से घबराया हुआ हूँ । बाज़ार में वही पुरानी शुभकामनायें हैं । जिनमें साल हटाकर कभी होली तो कभी दीवाली लिख देते हैं । अकर-बकर कुछ भी बके जा रहे हैं लोग । अकर-बकर आबरा का डाबरा का भोजपुरी रूपांतरण है । हम सब अपना और समाज का फालतूकरण कर रहे हैं । अंग्रेज़ी शब्द एब्सर्ड के एंबेसडर हो गए हैं । मेरा बस चलता तो एक शुभकामना पुलिस बनाता । जो भी पिछले साल की शुभकामनाओं का वितरण करता पाया गया उसे कमरे में बिठाकर एक हज़ार बार वही शुभकामनाएँ लिखवाता ताकि उसे जीवन भर के लिए याद रह जाता कि ये वही वाली शुभकामना है जिसे भेजने पर पुलिस ले गई थी ।

मैं भारत में आए शुभकामना संकट को राष्ट्रीय संकट मानता हूँ । इस संकट को दूर करने के लिए अखिल भारतीय शुभकामना आयोग बनाना ही पड़ेगा । ईश्वर के लिए इस आयोग का चेयरमैन रिटायर्ड जज नहीं होगा । मैं रिटायर्ड जज वाले आयोगों से भी उकता गया हूँ । जैसे किसी आयोग का जन्म रिटायर्ड जज के पुनर्जन्म के लिए ही होता है। आयोग से जजों का आतंक दूर करना भी मेरा मक़सद है । इसलिए शुभकामना आयोग का चेयरमैन ख़ुद बनूँगा । दुनिया से आह्वान करूँगा कि पुरानी शुभकामनाएँ न भेजें । इससे लगता है कि पुराना साल ही यू टर्न लेकर आ गया है । अगर आप शुभकामना नहीं भेजेंगे तब भी सालागमन तो होना ही है । जो लोग नया नहीं रच पायेंगे उनके लिए मैं मनोवैज्ञानिक चिकित्सा उपलब्ध कराऊँगा । ताकि उन्हें यक़ीन रहे कि बिना शुभकामना भेजे भी वो नए साल में जीने योग्य होंगे ।

प्लीज, पुरानी शुभकामनाओं से नए साल को प्रदूषित न करें । कुछ नया कहें । कुछ नया सोचें । आपके आशीर्वाद से कोई समृद्ध होने लगे तो नेता आपके हाथ काट ले जायेंगे । अपने दफ्तर में टाँग देंगे । इसलिए खुद को ही शुभकामना दीजिये कि आपको सालागमन पर किसी की शुभकामना की दरकार ही न हो । समृद्धि एक सामाजिक स्वप्न है या व्यक्तिगत हम यही तय नहीं कर पाये । सरकार सोचती है कि सबको समृद्ध करें । इंसान सोचता है कि खाली हमीं समृद्ध हों । लेकिन शुभकामनाओं की ये ग़रीबी मुझसे बर्दाश्त नहीं होती है ।

इसलिए हे प्रेषकों, आपके द्वारा प्रेषित शुभकामनाओं से सदेच्छा संसार में बोरियत पैदा हो रही है । आप किसी के द्वारा प्रेषित घटिया शुभकामना को किसी और के इनबाक्स में ठेलकर बदला न लें । जो जहाँ है, वहीं रहे । ये साल आकर चला जाएगा । कुछ काम नहीं है तो टाटा-407 बुक कीजिये । दस दोस्तों को जमा कीजिये और कहीं चले जाइये । मीट मुर्ग़ा भून भून के बनाते रहिए । स्वेटर उतार कर कमर से बाँध लीजिये या कंधे पर रख लीजिये । एक ठो म्यूज़िक सिस्टम लेते जाइयेगा । जब तक धूप रहे खान पान और डाँस करने के बाद घर आ जाइयेगा ।

चला चलंती की बेला में ये साल सला सल का ठेला है । अल्ल-बल्ल कुछ भी बकिये लेकिन जान लीजिए कि हमारी आपकी जीवन पद्धति का बंदोबस्त हो चुका है । शहर, पेशा और वेतन के अंतरों से ही अंतर क़ायम है वर्ना हमारी दुनिया एकरस हो चुकी है । लोड मत लीजिये । ऐश कीजिये । मस्ती का बहाना जिसके आने जाने से मिले, वही स्वागतयोग्य है । बस ध्यान रहे कि कूकर की सीटी सुनाई दे । वरना मुर्ग़ा जल-भुन गया तो मूड ख़राब हो जाएगा । आप अपना देखो जी । हम अपनी देखते हैं । दुर्भावनाओं से लगने वाले पकाऊ थकाऊ और उबाऊ शुभकामनाएँ न भेजें ।

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget