गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

प्रियंका पाण्डेय की कविता - वो जिए

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वो जिए

वो जिए

वो जीती है

और जिन्दा है

बनफूल की तरह |

उसे यकीन है

जिंदगी में ,

जैसे बच्चों का होता है ,

परीकथाओं में |

वो बुनती है

जिंदगी के गज्झिन सपने

जैसे माई बुनती थी

ठिठुरते रातों में स्वेटर

हमारे लिए |

हम मंगाते हैं मन्नतें

और प्रार्थनाएं करते हैं ,

उसके लिए

कि समय चाहे कैसा भी हो ,

वो बनी रहे,

उसके जीवन में सदा आनंद बना रहे ,

वो अपनी जिंदगी

अपने यकीन के साथ

जिन्दा रहे|

--

कवियत्री परिचय :

प्रियंका पाण्डेय,M.A, M.Phil

हाजीनगर

मेल : <s.priyanka.pandey@gmail.com>

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