शुक्रवार, 30 जनवरी 2015

रामनिवास डांगोरिया की कविताएँ

  (कविता) मां कितना कष्ट उठाती होगी जब गर्भ से रहती होगी मां करती होगी परहेज कितना जब गर्भ में पलता है लल्ला। क्या है उसे खाना क्या नहीं ख...

अशोक गुजराती की 2 लघुकथाएँ - खटका, दुर्योग

खटका    शोभा ताई को आज लौटने में देर हो गयी थी. धारावी के अपने झोंपड़-पट्टी इलाक़े में ज्यों ही वह दाख़िल हुई, रोज़ से अलग सुनसान रास्ते देख च...

प्रमोद भार्गव का आलेख - असैन्य परमाणु ऊर्जा का रास्ता साफ

भारत सहित तमाम विश्व  की ऊर्जा संबंधी दीर्घकालीन आवश्यकताओं की प्रतिपूर्ति में में हरित ऊर्जा सहित परमाणु ऊर्जा का भरपूर दोहन की एकमात्र वि...

चन्द्रकुमार जैन का आलेख - गलत सोच से बढ़ रहे तनाव पर चिंतन जरूरी

============================== आजकल तनाव हमारे वर्तमान जीवन की परिभाषा बन गयी है। रोजमर्रा की जिन्दगी में हैरान, परेशान होते हुए हम सारा द...

राजीव आनंद का आलेख - स्मृतिशेष : आर के लक्ष्मण के कार्टून बोलते थे

       (कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण और आम आदमी का कार्टून) आर के लक्ष्मण का नाम कार्टून का पर्याय बन गया था, सोमवार 26 जनवरी को उनकी कलम हमे...

मुकेश कुमार की कविताएँ--- क्यों याद आ रहे हैं गुजरे जमाने

  1. इक जिद थी बड़े होने की लाखों कोशिशों के बाद जब बड़े होने लगे अहसास हुआ की कुछ पीछे छूट रहा है। बीते लम्हे याद आने लगे जब देखता हूँ खुद क...

सुरेन्द्र कुमार पटेल का आलेख - प्राथमिक शिक्षा को रामभरोसे न छोड़ें

प्राथमिक शिक्षा को रामभरोसे न छोड़ें कई गंभीर मुददों में से एक हमारे देश की प्राथमिक शिक्षा है । प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक इसलिए है क्योंकि...

चन्द्रकुमार जैन का आलेख - अच्छा बोल कर बढ़ा सकते हैं आप अपनी अहमियत

अच्छा बोल कर बढ़ा सकते हैं आप अपनी अहमियत डॉ.चन्द्रकुमार जैन  नए युग में कार्य-व्यापार से लेकर जीवन-व्यवहार और रोजगार के क्षेत्र में भी संव...

गुरुवार, 29 जनवरी 2015

रामवृक्ष सिंह का व्यंग्य - खुशखबरी! देश में लकड़बग्घों की संख्या तेज़ी से बढ़ी!

व्यंग्य खुशखबरी! देश में लकड़बग्घों की संख्या तेज़ी से बढ़ी! डॉ. रामवृक्ष सिंह हाल ही में देश में बाघों की गणना की गई। पता चला कि बाघों ...

बुधवार, 28 जनवरी 2015

अशोक गौतम का व्यंग्य - ये जो पायजामे में हूं मैं

मैं लालकिले के पास बस का इंतजार करता फटे पोस्टर में से निकलने वाले हीरो के बारे में सोच रहा था कि तभी भीड़ में से अचानक चार जने मेरी ओर लपके।...

हुसैन के हास्य-व्यंग्य

हुसैन न केवल चितेरे थे, बल्कि हास्य-व्यंग्य में भी अपनी कूंची चलाया करते थे - अक्सर अपने पत्रों में. प्रस्तुत हैं उनके हास्य-व्यंग्य और हास-...

मंगलवार, 27 जनवरी 2015

प्रमोद भार्गव का आलेख - बाघों की वृद्धि अच्छी खबर

बाघों की वृद्धि अच्छी खबर प्रमोद भार्गव     देश में लुप्त हो रहे बाघों की संख्या बढ़ रही है,यह अच्छी खबर है,वरना 2006 के आसपास तो हालात ऐसे ...

सोमवार, 26 जनवरी 2015

चंद्रेश कुमार छतलानी का आलेख - गणतांत्रिक शिक्षा

आज 26 जनवरी 2015, जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र का राष्ट्रपति बराक ओबामा हमारी ख़ुशी में शामिल होने आयें है, तो एक यह सोच अवश्यम्भावी ...

गणतंत्र दिवस की कविताएँ

  जसबीर चावला लाल क़ालीन और पड़दादा ''''''''''''''''''''&#...

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