गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

भूकंप के मुहाने पर महानगरीय आबादी

प्रमोद भार्गव दुनिया के नामचीन विशेषज्ञों व पर्यावरणविदों की मानें तो सभी भूकंप प्राकृतिक नहीं होते,बल्कि इन्हें विकराल बनाने में हमारा भी ह...

अपनी-अपनी धर्मशालाएँ

डॉ दीपक आचार्य बस्तियों, महकमों और दुकानों के जंगलों में भटकते हुए हर तरफ और कुछ लगे न लगे, इनमें धर्मशालाओं की पक्की छाप जरूर दिखती है। ...

बुधवार, 29 अप्रैल 2015

एक को चुन लें दवा या दुआ

  डॉ दीपक आचार्य हर बीमारी के पीछे सिर्फ शारीरिक समस्याएं ही नहीं होती बल्कि इनमें मानसिक विकारों और तनावों का योगदान अधिक रहता है। दुनिया...

मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

नकचढ़ी राजकुमारी

कैथलीन मुलडून अनुवाद - अरविन्द गुप्ता मेरी बड़ी बहन 10 साल की है। उसका नाम है - पेनीलोप मेरी पाईपर। पर सब लोग उसे ‘पेनी’ नाम से बुलाते हैं,...

पिंग की कहानी

  मार्ज़ोरी फ्लैक और कुर्त वीज़   हिंदी अनुवाद अंशुमाला गुप्ता   एक बार की बात है- पिंग नाम का एक खूबसूरत छोटा बत्तख था। वह अपनी मां, अपने प...

कहानी - बदला

मोहम्मद इस्माईल खान  आज हरीराम अपनी जेल की कोठरी में हमेशा से कुछ ज्यादा ही परेशान है। आज उसकी बेटी मुलाकात करके गई है, वह एक ऐसी पुरानी इम...

सबक लें भूकंप से

तबाही का मंजर दिखाने वाला भूकंप हम सभी के लिए कई सारी चेतावनियां छोड़ गया है। यह अपने आप में ऎसे मार्मिक संदेश हैं जिनके मर्म को समझ जाएं तो...

डॉ॰ विमला भण्डारी के किशोर उपन्यास “कारगिल की घाटी” की समीक्षा

दिनेश कुमार माली कुछ दिन पूर्व मुझे डॉ॰ विमला भण्डारी के किशोर उपन्यास “कारगिल की घाटी” की पांडुलिपि को पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ। इस उपन्य...

प्रकृति के दबाव का मार्ग है-भूकंप

प्रमोद भार्गव भूकंप के बारे में और अधिक जानकारी पाने के लिए इस कड़ी पर जाएँ - http://vigyanvishwa.in/2015/04/27/earthquack/         बिना...

सोमवार, 27 अप्रैल 2015

खाली जगह रखें वरना मिट जाएंगे

डॉ दीपक आचार्य भूकंप तो आएगा ही, इससे बचना मुश्किल है। हम जिस ढंग से अधर्माचारण अपना चुके हैं, उन्मुक्त और स्वच्छंद हैं, स्वेच्छाचारिता को...

कहानी : आंटी नहीं फांटी

क़ैस जौनपुरी   - “चार समोसे पैक कर देना.” - जी, और कुछ? - और...ये क्या है? - ये साबुदाना वड़ा है. - ये भी चार दे देना. नाश्ते की दुकान पर ख...

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------